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दो साल में 250 पल्लेदारों में से महज एक को मिला योजना का फायदा

3 वर्ष पहले
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दिनभर सिर पर बोझा ढो कर परिवार पालने वाले कृषि उपज मंडी के पल्लेदारों(हमाल) के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना का लाभ पल्लेदारों को मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। इसी का नतीजा है कि दो वर्ष पहले शुरू हुई योजना के तहत अब तक महज एक पल्लेदार को ही लाभ प्राप्त हुआ है। ऐसे में योजना का प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण पल्लेदार इस योजना से वंचित हो रहे है। मंडी अधिकारियों ने बताया कि योजना का समय समय पर प्रचार प्रसार करने के साथ ही मंडी में कार्य करने वाले पल्लेदारों को पंजीकरण करवाने के लिए भी जागरूक किया जाता है। पल्लेदारों को जिन्दगी का कुछ आर्थिक भार कम करने के उद्देश्य से दो वर्ष पूर्व शुरू की गई महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना का लाभ देने के उद्देश्य योजना शुरू की गई थी। जब से कृषि उपज मंडी स्थापित हुई थी, तब से ही मंडी में कार्य करने वाले पल्लेदार मंडी से पंजीकृत नहीं थे। इसके लिए कई मर्तबा हमालों से संपर्क कर पंजीकरण करवाने के लिए कहा गया, लेकिन पंजीकरण करवाने मेंें किसी भी हमाल ने रूझान नहीं दिखाने के कारण पंजीकरण नहीं हो सका।

याेजना से हो रहे वंचित | सरकार ने एक अप्रैल 2015 में पल्लेदारों को राहत देने के उद्देश्य से महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना शुरू की थी। कृषि उपज मंडी में करीब 230 से 250 पल्लेदार काम करते है। जहां मंडी प्रशासन ने एक भी पल्लेदार का पंजीयन नहीं किया था। मंडी अधिकारियों ने मई से अब तक 75 पल्लेदारों का पंजीयन किया है। पंजीयन फीस के रूप में 20 रुपए व 500 रुपए धरोहर राशि जमा की है। योजना के नियमों के मुताबिक पल्लेदार का पंजीयन एक वर्ष का होना आवश्यक है।

योजना के तहत मिलेगा यह लाभ |मंडी में लाइसेंसधारी पल्लेदार की एक बेटी की शादी पर 20 हजार रुपए दिए जाने व इसमें एक पल्लेदार की अधिकतम दो बेटियों की शादी में सहायता, सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए 20 हजार रुपए वहीं अकुशल महिला मजदूर के प्रसव के दौरान 45 दिन का मजदूरी का भुगतान किया जाता है। मेधावी छात्रवृति पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान है।

महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना में अब तक एक पल्लेदार को योजना लाभ प्राप्त हुआ। वहीं 75 का पंजीकरण किया गया है। -महेश शर्मा, सचिव, कृषि उपज मंडी,ब्यावर

ब्यावर. कृषि मंडी में कार्य करते पल्लेदार।

भास्कर न्यूज|ब्यावर

दिनभर सिर पर बोझा ढो कर परिवार पालने वाले कृषि उपज मंडी के पल्लेदारों(हमाल) के लिए सरकार की ओर से चलाई जा रही महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना का लाभ पल्लेदारों को मिलता हुआ नहीं दिख रहा है। इसी का नतीजा है कि दो वर्ष पहले शुरू हुई योजना के तहत अब तक महज एक पल्लेदार को ही लाभ प्राप्त हुआ है। ऐसे में योजना का प्रचार प्रसार नहीं होने के कारण पल्लेदार इस योजना से वंचित हो रहे है। मंडी अधिकारियों ने बताया कि योजना का समय समय पर प्रचार प्रसार करने के साथ ही मंडी में कार्य करने वाले पल्लेदारों को पंजीकरण करवाने के लिए भी जागरूक किया जाता है। पल्लेदारों को जिन्दगी का कुछ आर्थिक भार कम करने के उद्देश्य से दो वर्ष पूर्व शुरू की गई महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना का लाभ देने के उद्देश्य योजना शुरू की गई थी। जब से कृषि उपज मंडी स्थापित हुई थी, तब से ही मंडी में कार्य करने वाले पल्लेदार मंडी से पंजीकृत नहीं थे। इसके लिए कई मर्तबा हमालों से संपर्क कर पंजीकरण करवाने के लिए कहा गया, लेकिन पंजीकरण करवाने मेंें किसी भी हमाल ने रूझान नहीं दिखाने के कारण पंजीकरण नहीं हो सका।

याेजना से हो रहे वंचित | सरकार ने एक अप्रैल 2015 में पल्लेदारों को राहत देने के उद्देश्य से महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना शुरू की थी। कृषि उपज मंडी में करीब 230 से 250 पल्लेदार काम करते है। जहां मंडी प्रशासन ने एक भी पल्लेदार का पंजीयन नहीं किया था। मंडी अधिकारियों ने मई से अब तक 75 पल्लेदारों का पंजीयन किया है। पंजीयन फीस के रूप में 20 रुपए व 500 रुपए धरोहर राशि जमा की है। योजना के नियमों के मुताबिक पल्लेदार का पंजीयन एक वर्ष का होना आवश्यक है।

योजना के तहत मिलेगा यह लाभ |मंडी में लाइसेंसधारी पल्लेदार की एक बेटी की शादी पर 20 हजार रुपए दिए जाने व इसमें एक पल्लेदार की अधिकतम दो बेटियों की शादी में सहायता, सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए 20 हजार रुपए वहीं अकुशल महिला मजदूर के प्रसव के दौरान 45 दिन का मजदूरी का भुगतान किया जाता है। मेधावी छात्रवृति पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान है।

महात्मा ज्योतिबा फुले कृषि मंडी योजना में अब तक एक पल्लेदार को योजना लाभ प्राप्त हुआ। वहीं 75 का पंजीकरण किया गया है। -महेश शर्मा, सचिव, कृषि उपज मंडी,ब्यावर

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