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आदेशों के बाद भी रात में नहीं खुल रहा भामाशाह काउंटर

3 वर्ष पहले
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प्रदेश के सबसे अधिक आउटडोर वाले अस्पतालों में शामिल राजकीय अमृतकौर अस्पताल में पिछले एक माह से रात में भर्ती होने वाले 1 हजार से अधिक मरीज भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से बाहर हो गए। कंप्यूटर ऑपरेटरों की कमी के चलते शाम 7 बजे के बाद सुबह 8 बजे तक भर्ती होने वाले मरीजों की नियमानुसार एक घंटे में टीआईडी जनरेट नहीं हाेने के कारण इन 1 हजार से अधिक मरीज ना सिर्फ भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से बाहर हो गए बल्कि एमआरएस को भी 80 हजार से अधिक का घाटा उठाना पड़ा है। हालांकि वर्तमान में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना काउंटर पर 6 कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यरत है। इनमें से तीन मेल ऑपरेटर हैं तथ बाकी तीन फिमेल ऑपरेटर कार्यरत है। लेकिन एक ऑपरेटर की कमी के कारण पिछले एक माह से शाम होते ही भामाशाह आईडी जनरेट काउंटर बंद हो जाता है। जिस कारण रात में भर्ती होने वाले मरीजों को भामाशाह का लाभ मिल पा रहा। गौरतलब है कि गरीबी के कारण कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में नहीं मरे इसको लेकर केंद्र सरकार ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की। योजना के तहत तीन सालों में हजारों लोगों ने इसका फायदा उठाया और कई गरीब तबके के लोगों को जानलेवा बीमारियों से निजात मिल सकी है। लेकिन हाल में योजना के दायरे को लेकर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कई पांबदियां लगा दी गई। पहले अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे बाद तक आईडी जनरेट की जा सकती थी। लेकिन अब जिस डेट में मरीज भर्ती हुआ है उसी डेट में आईडी जनरेट करना जरूरी है।

एक घंटे में जनरेट करनी है टीआईडी : अस्पताल में भर्ती होने के एक घंटे के भीतर अगर मरीज भामाशाह कार्ड नंबर बता दे तो ठीक वरना उसे सामान्य मरीज मान कर ही उपचार किया जाएगा। सिर्फ आपातकाल, दुर्घटना में 72 घंटे के दौरान इमरजेंसी मोड में टीअाईडी जनरेट की जा सकती है।

अभी 6 ऑपरेटर हैं कार्यरत : वर्तमान में एकेएच भामाशाह काउंटर पर 6 कंप्यूटर ऑपरेटर कार्यरत हैं। भामाशाह काउंटर पर दीपक, अजय, अभिषेक, पारूल, इंद्रा और श्वेता कार्यरत हैं। ऑपरेटरों ने बताया कि भामाशाह काउंटर पर कम से कम 7 से 8 कंप्यूटर ऑपरेटरों की जरूरत है। ऑपरेटरों ने बताया कि महिला ऑपरेटरों ने नाइट में काम करने से इंकार कर दिया।

1 हजार से अधिक मरीज हुए वंचित

ब्यावर। अस्पताल में भर्ती मरीज रात में टीआईडी जनरेट नहीं होने के कारण लाभ से वंचित हो गए।

पिछले एक माह में एकेएच में रात 8 से सुबह 8 बजे तक 1 हजार 143 मरीज भर्ती हुए। लेकिन रात में ऑपरेटर के नहीं होने के कारण ये मरीज भामाशाह योजना के लाभ से वंचित हो गए। अगर समय रहते इन मरीजों की टीआईडी जरनेट हो जाती तो एमआरएस को 80 हजार से अधिक का बीमा क्लेम मिल सकता था।

इनका कहना है

कंप्यूटर ऑपरेटरों की कमी के कारण रात में काउंटर नहीं खुल पा रहा है। नए ऑपरेटर की भर्ती भी की गई लेकिन दो दिन आने के बाद उसने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए कार्य करने में असमर्थता जता दी। नए ऑपरेटर की नियुक्ति की जाएगी या नाइट में इंडोर टिकट बनाने वाले ऑपरेटर को प्रशिक्षण दिया जाएगा।” डॉ. अभिषेक सिंह बालोटिया, नोडल ऑफिसर, भामाशाह, एकेएच ब्यावर

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