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आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भी सरकारी स्कूलों से जोड़ने के दिए दिशा-निर्देश

3 वर्ष पहले
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ब्यावर|अब आंगनबाड़ी केन्द्रों पर स्कूल पूर्व शिक्षा प्राप्त कर चुके व अध्ययनरत 5 से 6 वर्ष तक के बच्चों का नजदीक के स्कूल में कक्षा एक में दाखिला करवाया जाएगा। राज्य सरकार ने पूर्व में तीन वर्ष के बच्चों में शिक्षा की निरंतरता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों व आंगनबाड़ी केन्द्रों को समन्वित की योजना शुरू की थी। इसी को लेकर अब शिक्षा विभाग के शासन सचिव ने आदेश जारी कर सभी राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों को आंगनबाड़ी केन्द्र में अध्ययनरत 5 से 6 वर्ष के बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने के निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों ने बताया शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में नांमाकन वद्धि करने के साथ ड्राप आउट बच्चों की संख्या में गिरावट लाना भी है। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में 5 से 6 वर्ष के बच्चों को ही दाखिला दिया जाता है। लेकिन दूसरी ओर से निजी विद्यालयों में 3 से 4 वर्ष के बच्चों को भी दाखिला दे दिया जाता है। इन्हीं कारणों के चलते सरकारी स्कूलों में बच्चों के नांमकन पर प्रति वर्ष असर भी पड़ता है। जिसको देखते शिक्षा विभाग ने इस बार केन्द्र पर पढ़ने वाले बच्चों को प्रवेश देने का निर्णय किया है। जिससे सरकारी स्कूलों के संस्था प्रधानों को विद्यालय का नांमकन बढ़ाने के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा।

अभिभावकों को करेंगे प्रेरित : विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शासन सचिव के आदेश के तहत शिक्षा सत्र 2018-19 में इन बच्चों का कक्षा एक में आवश्यक रूप से प्रवेश करवाया जाए। इसके लिए स्कूल के संस्था प्रधान, उनके स्कूल में प्राथमिक कक्षाओं में भाषा का अध्यापन कराने वाली किसी महिला शिक्षिका को या महिला शिक्षिका नहीं होने पर अन्य शिक्षक को पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रभारी नामित करेंगे। इसके बाद स्कूल के संस्था प्रधान, पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रभारी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संयुक्त योजना बना कर अभिभावकों से सम्पर्क कर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे।

बैठक आयोजित कर नामांकन किया जाएगा सुनिश्चित : विद्यालय की वार्षिक शैक्षिक योजना निर्माण के समय आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को भी उपस्थित होना होगा तथा वार्षिक शैक्षिक योजना निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। इसके लिए अप्रैल माह में ही विद्यालय के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में सत्र 2018-19 के प्रारंभ में ही बैठक करनी होगी। इसमें आंगनबाड़ी केन्द्रों के छह वर्ष तक के अधिकाधिक बच्चों का नामांकन कराने पर विचार किया जाएगा तथा नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। आंगनबाड़ी केन्द्र विद्यालय परिसर में ही होने पर स्कूल के संस्था प्रधानों को प्रतिदिन कम से कम एक बार और पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रभारी को दो बार अवलोकन करना होगा। आंगनबाड़ी केन्द्र के विद्यालय परिसर में नहीं होने पर प्राचार्य को प्रति सप्ताह कम से कम दो बार केन्द्र का अवलोकन करना होगा। निरीक्षण करने के बाद अवलोकन बिंदु निरीक्षण पंजीका में दर्ज करने होंगे। पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रभारी को प्रतिदिन एक बार आंगनबाड़ी केन्द्र का अवलोकन करना होगा तथा आंगनबाड़ी कार्मिकों को संबलन प्रदान करना होगा। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले 5 से 6 वर्ष के बच्चों को इस बार कक्षा पहली में प्रवेश देने के निर्देश दिए है। जहां आदेश के बाद केन्द्रों पर 5 से 6 वर्ष के पंजीकृत बच्चों की सूचना प्राप्त की जा रही है। नया सत्र शुरू होने से पहले बच्चों को पहली कक्षा में प्रवेश दिलवाया जाएगा।

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