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डॉक्टर को जगाने के लिए चिल्लाए-पत्थर फेंके फिर भी गेट नहीं खोला सेवानिवृत्त कंपाउंडर से कराया प्रसव, अधिक खून बहने से प्रसूता की मौत

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बेगूं/जावदा

जावदा आदर्श पीएचसी के बाहर गुरुवार रात्रि तीन बजे प्रसूता तड़पती रही। अस्पताल खुला था, लेकिन कार्मिक नहीं थे। परिजनों ने डॉक्टर को जगाने के लिए आवाजें लगाईं, कंकड़ (पत्थर) भी फेंके, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। मजबूरन प्रसूता को सेवानिवृत्त कंपाउंडर के यहां ले गए। उसने बेटे को जन्म दिया, जिससे कुछ पल के लिए परिजनों में खुशी का माहौल हो गया। प्रसूता को घर ले गए। प्रसव सही प्रकार से नहीं होने के कारण करीब तीन घंटे बाद ज्यादा ब्लीडिंग होने से प्रसूता की मौत हो गई।

परिजनों के मुताबिक देवपुरा निवासी 30 वर्षीय समुंदर देवी प|ी हेमराज को गुरुवार रात्रि दो बजे प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने 108 पर कॉल किया, लेकिन नेटवर्क नहीं मिलने से कॉल नहीं हो पाई। जैसे-तैसे किराए की जीप से सात किमी दूर जावदा स्थित आदर्श पीएचसी पर करीब रात ढाई से तीन बजे के बीच पहुंचे। अस्पताल में कोई कार्मिक नजर नहीं आया। समुंदर को पीड़ा तेज होने लगी। आनन-फानन में डॉक्टर के निवास पर लेकर पहुंचे। डॉक्टर का दरवाजा खटखटाया, आवाजें लगाते हुए कंकड़ भी फेंके, लेकिन डॉक्टर ने दरवाजा नहीं खोला। अंत में जावदा में ही एक सेवानिवृत्त कंपाउंडर के क्लिनिक पर लेकर पहुंचे। यहां प्रसूता ने एक शिशु को जन्म दिया। एक बारगी परिजनों ने राहत की सांस ली लेकिन कुछ घंटों बाद परिवार की खुशियां काफूर हो गई।

देवपुरा से 108 नहीं मिलने पर 7 किमी दूर जीप से गर्भवती को जावदा लाए...नवजात बचा, मां का साया छिना

शर्मसार करती है यह नाकाम व्यवस्था... जन्मते ही मां का आंचल छिन जाना महज एक डॉक्टर या कंपाउंडर की नाकामी नहीं है। सवाल उठता है उस जिम्मेदारी पर जिसे जमीन पर भगवान कहा जाता है

खून इतना बहा कि जीप की सीटें सन गई... जिस जीप में समुंदर देवी को जावदा से देवपुरा प्रसव के बाद लाया गया। उसके चालक हीरालाल धाकड़ ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब जीप की सफाई करने लगा तो पाया कि जीप की सीटें खून से सनी हुई थीं। इसका कारण प्रसूता को अधिक ब्लीडिंग होना था। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते पीएचसी में इलाज मिल जाता तो शायद समुंदर देवी की जान बच जाती। परिजनों का आरोप है कि यह विभाग की लापरवाही से हुआ है। हमने परिवार की महिला को खो दिया।

24 घंटे ऑनकाॅल का नियम टूटा आदर्श पीएचसी में... जावदा आदर्श पीएचसी है। नियमानुसार आदर्श पीएचसी पर 24 घंटे ऑन कॉल डॉक्टर उपलब्ध रहने का नियम है। आदर्श पीएचसी पर नियुक्त डॉक्टर का मुख्यालय पर ही ठहरने का नियम है। कुछ दिन पहले ही जावदा पीएचसी को आदर्श घोषित किया और उदघाटन बेगूं विधायक सुरेश धाकड़ ने किया था। उल्लेखनीय है कि जावदा जिले के दुर्गम-दूरस्थ एवं पिछड़े क्षेत्र में है। अक्सर स्वास्थ्य सेवा में लापरवाही के मामले सामने आते रहे हैं। लेकिन सुधार नहीं हो रहा।

जिम्मेदारों का तर्क... स्टाफ लापरवाही मानने को तैयार नहीं, कलेक्टर ने जांच की बात कही...रावतभाटा बीसीएमओ डॉ. जीजे परमार का कहना है कि पता चला कि गर्भवति को जावदा गए थे, लेकिन पीएचसी के डॉक्टर से संपर्क नहीं किया। दूसरे दिन पता चला कि अधिक खून बहने से मौत हुई। पीएचसी के डॉ. सुधेश राघव का कहना है कि 108 पर कॉल नहीं आया। मेरे निवास पर लाने की कोई जानकारी नहीं है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह का कहना है कि मामला गंभीर है। पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। जांच के आधार पर कार्रवाई भी होगी।

एक्सपर्ट | डॉक्टर की मौजूदगी में प्रसव होता तो शायद बच जाती जान... जावदा आदर्श पीएचसी है। भास्कर ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञों से बातचीत की तो सामने आया कि यहां नियुक्त डॉक्टर की मौजूदगी में यदि समुंदर देवी का प्रसव होता तो ज्यादा ब्लीडिंग नहीं होती या फिर जटिलता होने पर रैफर भी किया जा सकता था, इससे प्रसूता की जान बच सकती थी, लेकिन डॉक्टर ने दरवाजा ही नहीं खोला तो परिजन मजबूरन प्रसूता को कंपाउंडर के यहां ले गए। जहां उचित चिकित्सा के अभाव में समुंदर देवी को अधिक ब्लीडिंग होती रही। इधर, मृतका के पति हेमराज भील सहित परिजनों ने आरोप लगाया कि काफी आवाज लगाने और किवाड़ पर कंकड़ मारने के बाद भी डॉक्टर ने दरवाजा नहीं खोला, डॉक्टर की यह लापरवाही भी समुंदर देवी मौत के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है।

समुंदर देवी

इस साल जिले में 20 मौत

इस साल जिले में 20 मौत हो चुकी हैं। इसमें प्रसव से पहले व बाद के मामले हैं। रावतभाटा ब्लॉक में तीन मामले आ चुके हैं।

जावदा में पिछले दो दिन से बीएसएनएल का नेटवर्क नहीं मिल रहा। मृतका के पति हेमराज ने 108 पर कई बार फोन किया, लेकिन नेटवर्क के अभाव में फोन नहीं लगा।

परिजन गांव ले आए लेकिन प्रसूता को ब्लीडिंग होती रही। घर आने के तीन घंटे बाद खून अधिक बहने से उसकी मौत हो गई।

इस घटना में लापरवाही और गलती जांच का विषय है। लेकिन परिजन जो आराेप लगा रहे हैं वह पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा करते हैं।

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