महिलाओं ने उपवास रख पति की लम्बी उम्र की कामना की
सुहागिनों ने पति की लम्बी उम्र और सुख शांति के लिए वट वृक्ष की पूजा की। नव विवाहिताओं में वट सावित्री पूजा को लेकर खास उत्साह दिखने को मिला। वट वृक्ष को आम, लीची मौसमी फल अर्पित करने, कच्चे सूत से बांधने और हाथ पंखे से ठंडक पहुंचाने के बाद महिलाओं ने आस्था के साथ इसकी परिक्रमा की। पूजा के बाद वट सावित्री कथा भी सुनी जाती है। प्रखंड के भोजा, चलकी, शाहपुर, पतला, अमारी, बरदाहा, छौड़ाही आदि जगहों यह पर्व धूमधाम से मनाया गया। ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन पड़ने वाले इस पर्व मंे सुहागिन महिलाओं ने पूजा की थाली सजाकर वट वृक्ष की 12 बार परिक्रमा की और फल-फूल चढ़ाकर सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना की।
व्रत से जुड़ीं मान्यताएं
संस्कृत वेदाचार्य पंडित रमेश झा कहते हैं कि ज्येष्ठ अमावस्या तिथि को हिन्दू महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखकर वट वृक्ष के नीचे सावित्री, सत्यवान और यमराज की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और संतान सुख प्राप्त होता है। मान्यता यह भी है कि इसी दिन सावित्री ने यमराज के चुंगल से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। उसी दिन से यह पर्व चलन में आया।
बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है
बछवाड़ा| व्रत कर रही महिलाएं बेबी कुमारी, कविता देवी, कोमल कुमारी, पिंकी कुमारी, सोनम देवी, शोभा देवी,कंचन देवी आदि ने बताया कि इस व्रत में महिलाएं वट वृक्ष को सावित्री के रुप में मानती है। पुरानी मान्यता के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है। इसलिए लोग वर्षों से इसे देव वृक्ष मानते आ रहे हैं। लोगो का मानना है कि इस वट वृक्ष के पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महिलाओं ने बांस की टोकरी में सप्त धान, गेहूं, चावल, तेल, कांगनी समेत अन्य सामाग्री लेकर वट वृक्ष के नीचे बैठ कर पहले ब्रह्मा सावित्री और फिर सत्यवान सावित्री की पूजा की।
पती की दीर्घायु को लेकर महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा
बलिया| बलिया प्रखंड एवं नगर पंचायत के विभिन्न गांव में मंगलवार को महिलाओं ने पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर वटवृक्ष की पूजा की। एक तरफ जहां महिलाएं समूह में गीत गाते हुए माथे पर कलश लेकर वटवृक्ष की ओर जा रही थी। वहीं अपने पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर वटवृक्ष के 108 फेरे लगाए।
सुहागिन महिलाओं ने की पूजा
बखरी| प्रखंड क्षेत्र में वटसावित्री पर्व को लेकर सवेरे से ही महिलाओं में उत्सवी माहौल देखा गया। सुहागिन महिलाएं नए वस्त्र, लहठी, सिंदूर धारण कर माथे पर कलश व हाथ में डोली लेकर सखी सहेलियों के साथ गीत गाती हुई वटवृक्ष के तले जा कर पूजा अर्चना की तथा सत्यवान व सावित्री की अमर कथा का श्रवण किया। इस बाबत पंडित शंभु ठाकुर ने बताया कि इस बार यह पर्व स्वार्थ सिद्धी के योग में पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ा गया है। पति के दीर्घायु होने की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं श्रद्धा भाव से इस व्रत को करती है।
वट वृक्ष के लगाए फेरे
भगवानपुर| प्रखंड में पति की लंबी आयु की कामना को लेकर सुहागिनों ने वट सावित्री व्रत पूजन किया गया। इसके साथ ही उपवास भी रखा। इस अवसर पर मेहदौली, भगवानपुर, रसलपुर, पासोपुर आदि जगहों में महिलाएं वट वृक्ष के नीचे पूजन व फेरे लगाती दिखी।
नहीं मिला वटवृक्ष तो गमलों में बरगद का पौधा लगा महिलाओं ने की पूजा
बेगूसराय| पर्यावरण के प्रति लोगों की उदासीनता और वृक्ष नही लगाने का असर अब वातावरण के अलावे पर्व और त्योहारों पर भी दिखने लगा है। मंगलवार को वट सावित्री पुजा होने पर लोग बरगद वृक्ष की तलाश में अपने घरों से दो से पांच किलोमीटर दूर जाकर भी पुजा की वहीं जिस मोहल्ले में वट का वृक्ष नही था। वहां महिलाओं ने गमलों में वट का पेड़ लगाकर उसकी पुजा की। मालूम हो कि शहर के तेजी से होते विकास और निर्माण के कारण पुराने बरगद और पीपल का अधिकांश पेड़ काट दिया गया है। जिसके कारण अब जब भी बरगद और पीपल के पेड़ों की पुजा की बारी आती है तो लोगों को दूर तक जाना पड़ता है अथवा घरों में खरीदकर इन वृक्षों को लगाया जाता है फिर उसकी पुजा की जाती है।
वीरपुर में भी सुहागिन महिलाओं ने की वट सावित्री की पूजा
वीरपुर| वीरपुर, नौला, डीह, मुजफरा, पकड़ी, जगदर, खरमौली आदि गांवों में स्थित वट वृक्ष के पास सुबह से ही नव विवाहित महिलाओं की भीड़ लगी रही। इस अवसर पर महिलाओं ने पति के दीर्घायु जीवन के लिए पूजा अर्चना की।