काव्य गोष्ठी : मैं मजदूर हूं, कलम का सिपाही नहीं
मैं मजदूर हूं, कलम का सिपाही नहीं, सभ्यता का भार ढ़ोता, कुदाल चलाता-प्रलेस के जिलाध्यक्ष सीताराम प्रभंजन की कविता पाठ से विप्लवी पुस्तकालय गोदरगावा में सोमवार की देर शाम एक कवि सम्मेलन प्रारंभ हुआ जो तीन घंटे तक लोगों को गुदगुदाया भी और सोचने को भी बाध्य किया। वहीं कवि आनन्द रमण ने अपनी रचना-लड़ाई लड़ती मेरी कविता, मेरी कविता को मारने की साजिश की जा रही है, सुनाकर प्रतिरोध के स्वर को तेज किया। जबकि मणिभूषण सिंह ने कविता-लालकिला हिन्दोस्तान की अनुपम अकथ कहानी। लालकिले का गर्व लिये फिरता हर हिंदुस्तानी। सदियों से इस लालकिले ने हर मुश्किल को देखा, लालकिला भारत की छाती के हिम्मत की रेखा है, सुनाकर वाहवाही बटोरी। मौके पर अमित रंजन भारती ने -ये समय, बच्चे के कुचले जाने का, उन्हें जिंदा जलाने का है, उन्हें बम से उड़ाने का है। सुनाकर व्यवस्था पर चोट किया। मनोरंजन विप्लवी ने अपनी कविता-सुन ले हो भैया, सुन ले हो बहना, सच का साथ देंगे पड़ेगा महंगा, सुनाकर वर्तमान दौर का हाल बयां किया।