बेलागंज | सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज:। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः। श्रीमद्भागवत के उक्त श्लोक के भावार्थ का उल्लेख करते हुए मुख्य वक्ता सह कतरासीन मठाधीश स्वामी रामप्रपन्नाचार्य ने भगवान के शरणागत होने से मिलने वाली गति का विस्तार से बखान किया। स्वामी जी अग्नि गांव में चल रहे ज्ञान यज्ञ में सोमवार को भगवत भक्तों को सम्बोधित कर रहे थे। प्रखंड क्षेत्र के अग्नि गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सह श्रीलक्ष्मीनारायण यज्ञ के छठे दिन अनंत विभूति श्री श्री 108 श्री स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी ने अपने प्रवचन में कहा कि भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। जो इंसान एकाग्रता से भागवत कथा का श्रवण और मनन करता है उसके जीवन में कभी कष्ट नही होता। भागवत कथा में राजा परीक्षित के प्रसंग को बताते हुए स्वामी जी ने कहा कि मोक्ष का साधन केवल है तो वह है भागवत कथा। संसार के संपूर्ण बिलासो को परित्याग कर राजा परीक्षित ने भगवान के प्रति शरणागत हो गए। आचार्य ज्ञानी जी, आचार्य नारायण ब्रह्मचारी जी, पंडित सत्येंद्र जी, पंडित राघवेंद्र जी पंडित रसिक बाबा एवं यज्ञ के मुख्य यजमान राकेश कुमार उपस्थित थे।