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बेटी पैदा न हों इसलिए परिवार नेेेे दूसरी बेटी के जन्म पर नाम रखा अंतिम, अब ऊंचा किया नाम

3 वर्ष पहले
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परिवार में और बेटी पैदा न हो इसलिए परिवार नेेेे दूसरी बेटी के जन्म के बाद नाम रखा अंतिम अब उसी बेटी ने परिवार का नाम ऊंचा किया है। ग्रामीण क्षेत्र में बेटी से बेटे की चाहत अधिक होती हैैै। एक से ज्यादा बेटी पैदा होने पर बेटी का नाम अंतिम रख दिया जाता है। अब उसी बेटी ने बाहरवीं की परीक्षा में जिले में प्रथम स्थान पर आकर परिवार का नाम रोशन किया हैैैै। परिवार के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। तक्षशिला विद्यापीठ बेरी की छात्रा अंतिम ने जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

बेरी. अंितम अपने मां िपता के साथ

पायलेट बनाना चाहती है अंतिम

अंतिम के पिता सतबीर सिंह का कहना है कि अंतिम का जन्म दूसरी बेटी के रूप में घर पर हुआ था। उससे पहले अंतिम की बड़ी बहन परिवार में है। उसके बाद एक बेटे ने जन्म लिया दोनों बेटियां होनहार है। बेटे के साथ दोनों बेटियों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा। सतबीर सिंह की बड़ी बेटी सोनिया एमबीबीएस की तैयारी कर रही वही अंतिम पढ़ लिखकर इंडियन एयरलाइन में पायलेट बनाना चाहती है। वो रोजाना 5 से 6 घंटे घर स्टडी करतीं थी। कन्हेटी गांव के ड्राइवर सतबीर की बेटी अंतिम ने बिना कोचिंग के ही स्टेट में टाॅप टेेन में स्थान पाया है।

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