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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत दे सकती है सरकार

3 वर्ष पहले
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पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि लोगों को राहत देने के लिए सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे विकल्प क्या हैं। इस बीच, एसबीआई रिसर्च ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ने पर आयात बिल में 8 अरब डॉलर (54,000 करोड़ रुपए) का इजाफा होगा। पिछले वित्त वर्ष तेल आयात बिल में 20% बढ़ोतरी हुई थी, क्योंकि मार्च 2017 तक तेल 53 डॉलर प्रति बैरल पर था जो इस वर्ष मार्च में बढ़कर 70 डॉलर पर पहुंच गया।

क्रूड अभी 80 डॉलर के आसपास है। रिपोर्ट में मार्च 2019 तक इसके 90 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। वर्ष 2018-19 के लिए औसत कीमत 83.9 डॉलर प्रति बैरल होगी जबकि 2017-18 में यह 73.6 डॉलर थी। यदि इस वर्ष जून में कीमत 90 डॉलर के पार गई तो मार्च 2019 तक यह 100 डॉलर पर पहुंच सकती है। तब 2018-19 में औसत कीमत 93 डॉलर होगी। इससे जीडीपी में 0.31% की कमी आएगी, महंगाई 0.58% और राजकोषीय घाटा 0.4% बढ़ जाएगा।

इंडस्ट्री ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर तत्काल एक्साइज ड्यूटी घटाने की मांग की है। फिक्की और एसोचैम ने कहा कि महंगे क्रूड से रुपया कमजोर होगा और इससे आयात बिल बढ़ेगा।

मौद्रिक नीति में ब्याज दरें बढ़ने से निजी निवेश कम होगा। इसलिए सरकार को पेट्रोल-डीजल पर तत्काल एक्साइज ड्यूटी घटानी चाहिए। केंद्र को राज्यों के साथ पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाने पर चर्चा करनी चाहिए।

इस वर्ष 2.5% हो सकता है चालू खाते का घाटा

क्रूड महंगा होने से 2018-19 में चालू खाते का घाटा बढ़कर जीडीपी का 2.5% हो सकता है। पिछले साल यह करीब 1.7% था। चालू खाते का घाटा एक अरब डॉलर बढ़ने पर रुपए की कीमत करीब 30 पैसे कम होती है। एक अरब डॉलर पोर्टफोलियो निवेश आने पर रुपया 26 पैसे मजबूत होता है।

इंडिकेटर आर्थिक सर्वेक्षण एसबीआई रिसर्च

का अनुमान का अनुमान

जीडीपी ग्रोथ 0.2-0.3% ग्रोथ में 0.16%

कम होगी कमी आएगी

चालू खाता घाटा 0.4% बढ़ेगा 0.27% बढ़ेगा

महंगाई 1.7% इजाफा होगा 0.3% बढ़ जाएगी

एजेंसी | नई दिल्ली

पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि लोगों को राहत देने के लिए सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि वे विकल्प क्या हैं। इस बीच, एसबीआई रिसर्च ने गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ने पर आयात बिल में 8 अरब डॉलर (54,000 करोड़ रुपए) का इजाफा होगा। पिछले वित्त वर्ष तेल आयात बिल में 20% बढ़ोतरी हुई थी, क्योंकि मार्च 2017 तक तेल 53 डॉलर प्रति बैरल पर था जो इस वर्ष मार्च में बढ़कर 70 डॉलर पर पहुंच गया।

क्रूड अभी 80 डॉलर के आसपास है। रिपोर्ट में मार्च 2019 तक इसके 90 डॉलर तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। वर्ष 2018-19 के लिए औसत कीमत 83.9 डॉलर प्रति बैरल होगी जबकि 2017-18 में यह 73.6 डॉलर थी। यदि इस वर्ष जून में कीमत 90 डॉलर के पार गई तो मार्च 2019 तक यह 100 डॉलर पर पहुंच सकती है। तब 2018-19 में औसत कीमत 93 डॉलर होगी। इससे जीडीपी में 0.31% की कमी आएगी, महंगाई 0.58% और राजकोषीय घाटा 0.4% बढ़ जाएगा।

इंडस्ट्री ने सरकार से पेट्रोल और डीजल पर तत्काल एक्साइज ड्यूटी घटाने की मांग की है। फिक्की और एसोचैम ने कहा कि महंगे क्रूड से रुपया कमजोर होगा और इससे आयात बिल बढ़ेगा।

मौद्रिक नीति में ब्याज दरें बढ़ने से निजी निवेश कम होगा। इसलिए सरकार को पेट्रोल-डीजल पर तत्काल एक्साइज ड्यूटी घटानी चाहिए। केंद्र को राज्यों के साथ पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में लाने पर चर्चा करनी चाहिए।

पेट्रोल 33 पैसे और डीजल 25 पैसे महंगा

सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 76.57 और डीजल की 67.82 रुपए हो गई। रविवार की तुलना में पेट्रोल 33 पैसे और डीजल 25 पैसे महंगा हुआ है। 14 मई से 8 दिनों में पेट्रोल के दाम 1.94 रुपए और डीजल के 1.89 रुपए बढ़े हैं।

क्रूड 10 डॉलर महंगा हुआ तो

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