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अब 60 किलो वजनी पटरी पर 150 किमी की स्पीड से दौड़ेगी ट्रेनें, हादसों में आएगी कमी

3 वर्ष पहले
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रेलवे 52 किलो को हटाकर 60 किलो की लगा रहा पटरी

क्षमता बढ़ने से रेल हादसों में भी आएंगी कमी

विनोद पातरिया | बैतूल

रेलवे ट्रैक की क्षमता बढ़ाने के लिए 52 किलो की पटरी हटाकर 60 किलो वजनी पटरी लगाई जा रही है। पटरी बदलने से रेलवे ट्रैक की क्षमता बढ़ेगी। इससे ट्रैक और अधिक मजबूत होने से रेल हादसों में कमी आएगी और ट्रेन 150 किमी की स्पीड से चल सकेगी।

रेलवे ने इटारसी-नागपुर सेक्शन के धाराखोह-घोड़ाडोंगरी ट्रैक पर 60 केजी की पटरी लगाने का कार्य लगभग पूर्ण कर लिया है। घोड़ाडोंगरी-बरबटपुर ट्रैक पर पटरी बदलने का कार्य चल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार रेलवे के इंजीनियर ने बताया 52 किलो के स्थान पर 60 किलो की पटरी लगाई जा रही है। इससे ट्रैक की क्षमता में वृद्धि होगी। इस पटरी पर 150 किमी की स्पीड से ट्रेनें चल सकती है। जिससे आने वाले दिनों में नागपुर-इटारसी सेक्शन पर ट्रेनों की गति बढ़ाई जा सकेगी।

वाइब्रेशन कम हो जाएंगे, जमीन से चिपकी रहेगी पटरियों का वजन बढ़ने से इनमें वाइब्रेशन कम होंगे। वाइब्रेशन कम होने से डिब्बे पटरी से उतरने की आशंकाएं कम हो जाएंगी। पटरियां हैवी होने से एक-दूसरे से लिंक भी मजबूती से होगी।

एक किलोमीटर में 120 स्लीपर अधिक लगेंगे

60 किलो वजन की पटरी लगाने से अब पटरियों के बीच लगाए जाने वाले स्लीपर की संख्याओं में भी वृद्धि होगी। हर एक किलोमीटर पर 1660 कांक्रीट स्लीपर बिछाई जा रही है। पहले ट्रैक पर एक किलोमीटर में 1540 कांक्रीट स्लीपर बिछाई जाती थी। यानी पहले की अपेक्षा अब 120 स्लीपर अधिक बिछ रही है। नई स्लीपर 457 किलो की हैं। इससे एक्सप्रेस ट्रेनों को अधिकतम 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक की जा सकती है।

300 जीएमटी अधिक होगी, पटरी की क्षमता

रेलवे ट्रैक में एक मीटर की पटरी के वजन के अनुसार उसकी क्षमता तय की जाती है। एक मीटर रेलवे ट्रैक का वजन पूर्व में 52 किलो होता था। जिसे बदल कर रेलवे अब 60 किलो वजन का कर रही है। पहले जहां 52 किलो वजन की पटरी की क्षमता 500 जीएमटी थी। वह 60 किलो वजन की पटरी लगाने से 800 जीएमटी हो जाएगी। जिससे पटरी की लाइफ में बढ़ोत्तरी होगी।

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