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हॉस्टलों में नहीं चल रहे पंखे, ठंडक पाने नाले किनारे बैठकर पढ़ाई कर रहे छात्र

3 वर्ष पहले
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आदिवासी बाहुल्य वाले बैतूल जिले के कुल बजट का एक तिहाई आदिम जाति कल्याण के लिए मिलता है लेकिन आदिवासी हॉस्टलों में पंखे खराब होने और कूलर नहीं होने के कारण स्टूडेंट्स को नाले के किनारे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। कई स्टूडेंट्स हॉस्टल में एडमिशन होने के बावजूद, गर्मी में हो रही परेशानी के कारण घर से परीक्षाएं दे रहे हैं। कॉलेज की परीक्षाएं सिर पर हैं और हॉस्टलों में कूलर नहीं हैं, पंखे खराब हैं। इस कारण छात्र ठंडक में बैठकर पढ़ाई करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। नाले के किनारे सांप-बिच्छू के खतरे के बीच झाड़ियों में भी कुर्सी टेबल लगाकर पढ़ना इनकी मजबूरी बन गई है।

इंतजाम किए जाएंगे

हॉस्टलों में पंखे सुधरवाने और गर्मी से निपटने के इंतजाम करवाने का प्रयास किया जाएगा। स्टूडेंट्स को परेशानी नहीं हो इसके पूरे इंतजाम किए जाएंगे। बीएस बिसोरिया, प्रभारी सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण



भास्कर जब पहुंचा हॉस्टल तब यह थे हाल: करीब के नालेे किनारे लगे थे टेबल-कुर्सी, झुरमुट में पढ़ रहे थे स्टूडेंट्स

भास्कर ने जब सोमवार दोपहर गुरुद्वारा रोड स्थित पोस्ट मैट्रिक एससी बालक छात्रावास और पोस्ट मैट्रिक एसटी बालक छात्रावास का मुआयना किया। तो इन हॉस्टलों के छोटे कमरों में एक कमरे में चार-चार स्टूडेंट्स के रहने की बात समाने आई। कमरों में खराब बेरिंग वाले पंखे थे, कूलर थे ही नहीं। जिस कारण स्टूडेंट्स समीप बहने वाले नाले के किनारे झाड़ियों में खतरा मोल लेकर कुर्सी टेबल लगाकर पढ़ाई कर रहे थे।

6 हजार 55 स्टूडेंट्स हैं हॉस्टल में

जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग के 94 हॉस्टल और आश्रम हैं। इनमें 6 हजार 55 स्टूडेंट्स रहते हैं। अधिकांश जगहों पर कूलर है ही नहीं। वहीं पंखे भी अधिकांश खराब पड़े हैं। पंखे चलते भी हैं तो तेज नहीं चलते। 40 के पार पारा पहुंचने के कारण इनकी परेशानियां अब बढ़ गई है।

कल है पेपर, गर्मी के कारण पढ़ नहीं पा रहे थे

हॉस्टल में रहकर कॉलेज की परीक्षाएं दे रहे बीए फाइनल और बीएससी के बहुत से स्टूडेंट्स सोमवार को नाले के किनारे टेबल-कुर्सी लगाकर पढ़ते हुए मिले। नाले के ठीक बगल में झाड़ियों में कुर्सी-टेबल लगाकर पढ़ रहे मायाराम कुमरे, रामदास कापसे, सुनील परते ने बताया हॉस्टल में भयानक गर्मी है। इसलिए यहां पर नाले किनारे पढ़ना पड़ रहा है।

कूलर की हवा में पढ़ने घर गए छात्र, वहीं से दे रहे परीक्षा

गर्मी बढ़ने के कारण कॉलेज स्टूडेंट्स के लिए बनाए पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावासों में उपस्थिति अचानक घट गई है। गुरुद्वारा रोड के पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में 50 सीटों के हॉस्टल में 30 स्टूडेंट्स ही उपस्थित थे। इसी तरह 60 सीटर पोस्ट मैट्रिक बालक छात्रावास में केवल 45 स्टूडेंट्स ही थे। छात्रों ने बताया हॉस्टल में गर्मी से निपटने के इंतजाम नहीं हैं अधिकांश स्टूडेंट्स घर चले गए हैं वहीं से परीक्षा दे रहे हैं।

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