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लाल चंदन की सुगंध से महकेगी नर्सरी, लगेंगे 2500 पौधे

3 वर्ष पहले
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वन विभाग की कालापाठा नर्सरी में अब सैकड़ों चंदन के पौधों से महकेगी, चंदन के ये पौधे वातावरण को सुगंधित करने के साथ ही स्वास्थ्य बेहतर करने में मदद भी करेंगे। हाल ही में मैसूर से जबलपुर नर्सरी होते हुए चंदन के बीज बैतूल की नर्सरी पहुंचे हैं।

कालापाठा में 2.5 एकड़ जमीन वन विभाग की नर्सरी है। अब तक नर्सरी में सागौन और आंवला के पौधे ही उगाए जाते थे। लेकिन अब यहां चंदन के पौधे उगाए जाएंगे। चंदन के पौधे उगाने के लिए कर्नाटक के मैसूर से लाल चंदन का बीज बुलाया था। यह बीज जबलपुर की नर्सरी में आने के बाद पार्सल के जरिए बैतूल नर्सरी पहुंच चुका है। अब इन बीजों की बुआई करने की तैयारी की जा रही है।

बीज आ चुके हैं, जल्द पौधे तैयार किए जाएंगे

नर्सरी में लाल चंदन के बीज आ चुके हैं। इन बीजों को रोपकर अब पौधे तैयार किए जाएंगे। जल्द ही बीजों को उपचारित कर पौधे तैयार किए जाएंगे। मोहन मीणा, सीसीएफ, अनुसंधान शाखा

अच्छी पहल

कालापाठा में 2.5 एकड़ जमीन पर बनी है नर्सरी, मैसूर से आया लाल चंदन, वन विभाग लगाएगा

वर्तमान में नर्सरी में 7.73 लाख पौधे हैं

वर्तमान में नर्सरी में हर्रा, बहेड़ा, आंवला, आम, नीम, कुसुम समेत 32 प्रजातियों के 7.73 लाख पौधे हैं। इन पौधों को जिले में जंगलों में होने वाले पौधरोपण के लिए भेजा जाता है।

2500 बीज उपचारित कर बोए जाएंगे

अब नर्सरी में 2500 बीज उगाए जाएंगे। बीज उपचारित कर एक हिस्से में लगाए जाएंगे। इसके बाद इनके बड़े होने पर इनके अलग-अलग हिस्सों का उपयोग भी किया जा सकेगा। कुछ पौधे तैयार कर अन्य नर्सरियों और जंगलों में भी भिजवाए जाएंगे।

औषधीय गुण से भरपूर है लाल चंदन

चंदन के पेड़ के अलग-अलग हिस्से औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। इसका उपयोग माइग्रेन, मांसपेशियों के दर्द, तनाव दूर करने, त्वचा निखारने में किया जाता है। पतंजलि जैसे संस्थान भी लाल चंदन का अपनी औषधियों में बहुत बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं। इस तरह आयुर्वेदिक औषधियां बनाने में भी यह लाल चंदन उपयोगी साबित हो सकता है।

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