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सांची दूध प्लांट में मठा, श्रीखंड व पेड़े बनाने की तैयारी, कमरे को ठंडा रखने आईं मशीनें

3 वर्ष पहले
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50 हजार लीटर दूध स्टोर करने बनेगा प्लांट के पिछले हिस्से में चिलिंग चैंबर

1983 में शुरू हुआ था प्लांट, 20 हजार लीटर दूध की है चिलिंग क्षमता

भास्कर संवाददाता | बैतूल

सांची दूध प्लांट में 50 हजार लीटर दूध स्टोर करने के लिए कूलिंग चैंबर बनाया जा रहा है। इसके लिए राजधानी भोपाल से मशीनें आ चुकी है। अब इन्हें चैंबर में लगाया जाएगा इससे दूध लंबे समय तक स्टोर करके रखा जा सकेगा। इस अतिरिक्त दूध से अब मठा, मीठा दही और पेड़े बनाने की प्लानिंग भी की जा रही है। कूलिंग सेंटर का काम पूरा होने के बाद इसका काम शुरू होगा।

सांची दूध प्लांट में रोज 30 हजार लीटर औसतन दूध की आवक होती है, लेकिन कूलिंग क्षमता 20 हजार लीटर की ही है। 10 हजार लीटर दूध औसतन रोज भोपाल सांची प्लांट और जिले के बाहर के अन्य सांची प्लांटों को भेज दिया जाता हैं। लेकिन अब इस अतिरिक्त दूध को प्लांट में ही स्टोर करके रखा जा सकेगा। कई बार सांची दूध प्लांट में दूध की आवक अचानक कम हो जाती है। गर्मियों के सीजन में अक्सर ऐसा होता है। ऐसे में शहरवासियों को दूध के पैकेट नहीं मिल पाते हैं। लेकिन कूलिंग क्षमता बढ़ जाने के बाद ऐसा नहीं होगा।

दूध के स्टोरेज की समस्या होगी दूर, हमेशा रहेगा पर्याप्त दूध

सांची दूध प्लांट में दूध की औसत आवक वर्तमान में 30 हजार लीटर रोज है। लगभग हर दिन अतिरिक्त बचने वाला दूध भोपाल भेज दिया जाता है, लेकिन अब इस अतिरिक्त दूध को स्टोर कर इससे अन्य उत्पाद बनाए जाएंगे।

मशीनें आ चुकी हैं

शीघ्र लगेंगी

कूलिंग चैंबर बनाने के लिए राजधानी से मशीनें आ चुकी हैं। इन्हें नए बने हॉल में लगाया जाएगा। इस चैंबर के बनने से प्लांट में 50 हजार लीटर दूध स्टोर किया जा सकेगा। इस अतिरिक्त दूध से मठा, दही समेत अन्य उत्पाद भी बनाए जाएंगे। एम सतीश, एजीएम, सांची दूध प्लांट

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