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प्लास्टिक कचरा प्रोसेसिंग प्लांट बंद, नपा को रोज 22 हजार का नुकसान, ठेकेदार नहीं कर रहा काम

3 वर्ष पहले
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10 लाख की लागत से बुलवाई थी मशीनें

नपा ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2016 के पहले शहर में प्लास्टिक कचरे के निपटारे के लिए कोठी बाजार में प्लास्टिक कचरे के निपटारे की यूनिट और वर्कशॉप बनाई थी। शहर के कचरे से निकले प्लास्टिक कचरे को निपटाने के लिए 10 लाख रुपए की लागत से तीन मशीनें बुलाई थी। यहां 3 लाख रुपए खर्च कर भवन और वर्कशॉप भी बनाई थी।

बैतूल। बंद पड़ा हुआ प्लास्टिक कचरे के निपटारे के लिए बनाया प्लांट।

पीएम सड़क विभाग से हुआ था एग्रीमेंट

नपा ने दो साल पहले प्रधानमंत्री सड़क विभाग से प्लास्टिक सप्लाई का एग्रीमेंट किया था। शहर से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को साफ कर बेलिंग, मेलिंग और फटका मशीनों से आकार देकर प्रधानमंत्री सड़क विभाग को भेजे जाने थे। इसके बदले में 22 रुपए प्रति किलो की दर से नपा को राशि मिलनी थी। लेकिन प्लास्टिक नहीं पहुंचने से आमदनी बंद है।

ठेकेदार पिछले कुछ समय से लापरवाही कर रहा है

प्लास्टिक कचरे के निपटारे के लिए बनाए प्रोसेसिंग प्लांट का काम ठेके पर दिया था। ठेकेदार पिछले कुछ समय से लापरवाही कर रहा है। काम बंद है उसे नोटिस जारी किया जाएगा। दोबारा ठेका कर काम शुरू करवाया जाएगा। अशोक वाघमारे, सेनेटरी इंस्पेक्टर, नपा बैतूल

15 दिन से बंद है प्लांट पर काम

भास्कर ने बुधवार दोपहर इस वर्कशॉप का मुआयना किया तो आसपास के लोगों ने बताया प्लास्टिक कचरा प्रोसेसिंग प्लांट 1 महीने से बंद है। अंदर देखने पर पता चला मशीनों पर मकड़ी के जाले लगे हुए हैं। इन पर कर्मचारियों के छोड़े हुए पैंट -शर्ट लटके हुए थे। बेलिंग और मेलिंग मशीनें वर्कशॉप के अंदर धूल खा रही हैं। वहीं फटका मशीनें वर्कशॉप के बाहर खुले में बिना इस्तेमाल लंबे समय से पड़ी है। यहां कोई कर्मचारी नहीं था।

बैतूल। मशीन में लगे जाले।

हर दिन कमा सकते हैं 22 हजार रुपए

शहर से रोज 40 टन कचरा निकलता है। इसमें से 1 टन प्लास्टिक कचरा होता है। प्लास्टिक कचरे के निपटारे के लिए लगाई यूनिट भी 1 टन क्षमता की है। यदि इस एक टन कचरे को सही ढंग से प्रोसेसिंग कर ली जाती तो 22 रुपए प्रति किलो के हिसाब से एक दिन में 22 हजार रुपए कमाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।

सड़कें बनती तो आती मजबूती

यदि इस प्लास्टिक कचरे से सड़कें बनाईं जाती तो कचरा निपटारे के साथ मजबूत सड़कें भी बनती। अधिक स्ट्रैंथ वाली सड़कें बनने से लोगों को लंबे समय तक बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलतीं। लेकिन अब प्लास्टिक के टुकड़े नहीं बनने के कारण सड़कें भी बिना प्लास्टिक बनाई जा रही है।

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