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74 बांधों में स्टोर 24 अरब लीटर पानी गायब

3 वर्ष पहले
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जिले के 147 डेम में से 74 बांधों का 24 अरब लीटर पानी गायब हो गया और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं अधिकारी तो यह कह रहे हैं कि यह पानी भाप बनकर उड़ गया। वहीं एक्सपर्ट का मानना है कि इतनी अधिक मात्रा में पानी का वाष्पीकरण से भाप बनकर उड़ ही नहीं सकता। पानी गायब होने का रहस्य अब जांच का विषय बन गया है।

जिले के 147 बांधों में से 73 बांधों का पानी इस साल किसानों को दिया गया। 74 बांधों का 39 अरब लीटर पानी किसानों को नहीं देते हुए रिजर्व रखा था। इस पानी में से 15 अरब लीटर पानी ही बांधों में बचा है। लेकिन 24 अरब लीटर पानी कहां गया इसकी कोई भनक न तो विभाग को है और न ही अधिकारियों को। यह पानी चोरी हो गया या उड़ गया इसकी पड़ताल करने की सुध भी अब तक प्रशासन ने नहीं है। बांधों के पानी को सुरक्षित रखने आठ मैराथन बैठकें नवंबर और दिसंबर में हुईं। इन बैठकों में सख्त नियम बने लेकिन बांधों का पानी नहीं बचाया जा सका।

तरह -तरह के बैन लगाए सब बेअसर

जलसंसाधन विभाग ने दिसंबर में बांधों से पानी लेने की सख्त नियमावली लागू की थी। बांध में 5 हार्सपावर से अधिक क्षमता का पंप नहीं लगाने के आदेश हुए थे। बांध से 1 किलोमीटर से अधिक दूरी पर कनेक्शन नहीं देने की बात भी तय की थी। लेकिन बांधों पर इस नियमावली को लागू करवाने के लिए चौकीदार ही नहीं हैं।

अधिकांश बांधों में पानी खत्म है। केवल कुछ बांधों में ही पानी है, वह भी एलएसएल के थोड़ा ही ऊपर है। वाष्पीकरण से भी पानी कम हुआ है। पानी चोरी होने की स्थिति नहीं है। अमर येवले, ईई, जलसंसाधन विभाग, बैतूल डिवीजन

बांधों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इस संबंध में जलसंसाधन विभाग की ओर से हमें पत्र भी मिला है। स्टाफ का इंतजाम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शशांक मिश्र, कलेक्टर

बैतूल। रानीपुर डेम में पानी सूखने के बाद लोगों ने कर दी बोवनी।

केवल 20 चौकीदार, सुरक्षित कैसे रह सकता है पानी
जिले के 147 बांधों के पानी की सुरक्षा के लिए जलसंसाधन विभाग के पास केवल 20 चौकीदार हैं। 117 बांधों में पानी की सुरक्षा की जिम्मेदारी डेम के समीप रहने वाले गांव वालों पर ही है। इस जिम्मेदारी को वे किस तरह निभा रहे हैं यह लाखापुर डेम का पानी चोरी हो जाने की घटना के बाद सामने आ चुका है। जलसंसाधन विभाग ने दिसंबर में जिला पंचायत को पत्र लिखकर बांधों की सुरक्षा के लिए स्टाफ देने की मांग की थी। यह मांग आज तक पूरी नहीं हुई है।

केवल इन बांधों में थोड़ा पानी
सांपना, गोंडीगौला, उड़दन, झगड़िया, कोसमी, चंदोरा, बुंडाला डेम समेत अन्य बांधों में ही वर्तमान में थोड़ा बहुत पानी है। इन बांधों में भी एलएसएल के थोड़ा ही ऊपर पानी बचा है। ऐसे में पानी कहां गया इसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन प्रशासन को अब तक इसकी भनक भी नहीं है। सांपना, बुंडाला और चंदोरा जैसे बड़े बांधों में ही इनकी क्षमता का नाममात्र का पानी है, स्थिति चिंताजनक है।

कुर्सी डेम की नहर पर ढाबा बनाने प्रयास, केस दर्ज
डेम के पानी के साथ बांधों की नहरें भी सुरक्षित नहीं हैं। चार दिन पहले जलसंसाधन विभाग के कुर्सी डेम से निकली नहर में पानी का फ्लो नहीं होने के कारण कुछ लोग नहर की इस जमीन पर ढाबा बनाने का प्रयास कर रहे थे। जलसंसाधन विभाग के इंजीनियरों ने मुआयना कर आरोपियों पर एफआईआर दर्ज करवाई है। जलसंसाधन ईई अमर येवले ने बताया नहर की जमीन पर निर्माणे की तैयारी कर रहे लोगों की एफआईआर की है।

वाष्पीकरण के केल्कुलेशन से भी मैच नहीं आंकड़े
जलसंसाधन विभाग के रिटायर्ड एसडीओ एआर दीक्षित ने बताया बारिश में बांधों से 1 फीट, ठंड के मौसम में 2 फीट और गर्मी के मौसम में 3 फीट पानी एक सीजन में यानी तीन महीने में कम होता है। इस साल अब तक गर्मी तेज नहीं पड़ी है। ऐसे में बांधों से पानी का वाष्पीकरण होना संभव नहीं। जलसंसाधन विभाग में नर्मदा घाटी परियोजना में ईएनसी के पद से रिटायर हुए एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया गर्मी में तीन महीने में अधिकतम केवल 2 फीट पानी वाष्पीकरण से कम हो सकता है। 24 अरब लीटर पानी वाष्प बनकर उड़ना असंभव है।

जिले में इतने बांध

इतना है पानी
जिले के 147 बांधों की कुल पानी स्टोरेज क्षमता, 2 खरब लीटर है।

इस साल बारिश के बाद 147 बांधों में 1 खरब 29 अरब लीटर पानी स्टोर हुआ था।

इसमें से 90 अरब लीटर पानी सिंचाई के लिए दिया था। केवल 13955 हेक्टेयर फसल सिंचित हुई है।

इस तरह 39 अरब लीटर पानी बांधों में बचना चाहिए था, लेकिन 15 अरब लीटर ही वर्तमान में बचा है।

24 अरब लीटर पानी कहां गया इसकी जानकारी प्रशासन को नहीं है।

इस साल अब तक गर्मी तेज नहीं पड़ी है। ऐसे में बांधों से पानी का वाष्पीकरण भी होता तो बमुश्किल 2 अरब लीटर पानी ही वाष्पीकृत होता।

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