माता अदिति, कौशल्या, देवकी, यशोदा जैसी माताएं युगों-युगों से पूजी जा रही हैं, क्योंकि इन्होंने भगवान को अपने पेट में नौ माह पाला है। मनुष्य अपने कर्म के अनुपात में सुख-दुख पाता है, इसलिए आने वाले सुख की प्राप्ति के लिए कर्म को सुकर्म में बदल देना चाहिए। यह बात हर्षित कृष्ण बाजपेयी ने मलकापुर में आयोजित भागवत कथा में शनिवार को कही। आगे पं. बाजपेयी ने बाबा भोलेनाथ का माता पार्वती के विवाह की विचित्रता युक्त कथा सुनाई और दक्ष यज्ञ विध्वंस से घमंड नहीं करने, महिलाओं को सनातन संस्कृति में स्थापित सती माता के प्रत्येक चरित्र को आत्मसात करने की सीख दी।
दनोरा में श्रीकृष्ण जन्म का उत्सव
इधर दनोरा में स्व. इमरत लाल खवादे की स्मृति में चल रही भागवत कथा में पं. विवेकानंद महाराज ने शनिवार को श्रीकृष्ण जन्म उत्सव की कथा सुनाई। इस मौके पर कृष्ण जन्म की झांकी सजाई। नारायण खवादे ने बताया शनिवार रात को सरस्वती भजन मंडल मंडईखुर्द की गायिका सीमा श्रृंगारे ने शानदार भजन प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया सोमवार को रामसत्ता का आयोजन होगा। रामसत्ता में नवज्योति मंडल धपाड़ा तथा हरिओम मंडल मयावानी के कलाकार राम भजनों की प्रस्तुति देंगे।