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प्रवेश-पत्र पाने श्रमिकों के बच्चों को खर्च करने पड़ रहे रुपए

3 वर्ष पहले
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमोदय आवासीय स्कूल की चयन परीक्षा में बैठने के लिए श्रमिकों के बच्चों को जेबें हल्की करनी पड़ रही है। वे एडमिशन कार्ड के लिए 20 से 25 रुपए चुका रहे हैं। जबकि श्रमिकों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा व आवास सुविधा देने यह परीक्षा ली जा रही है। अब मंडल व शिक्षा विभाग अपनी लापरवाही छुपाने बच्चों के वाट्स एप पर ऑनलाइन प्रवेश पत्र निकालने की सलाह दे रहे हैं।

दरअसल, मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल के पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमोदय आवासीय स्कूल में एडमिशन के लिए चयन परीक्षा 20 मई को होना है। यहां श्रमिकों के बच्चों काे निशुल्क शिक्षा दी जाती है। परीक्षा में बैठने के लिए छात्रों को ऑनलाइन एडमिशन कार्ड जारी किए हैं, वैसे तो यह एडमिशन कार्ड विभाग व स्कूलों के माध्यम से दिए जाने थे, लेकिन विभाग एडमिशन कार्ड न बांटकर बच्चों को ऑनलाइन एडमिशन कार्ड निकालने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में बच्चे इंटरनेट कैफे में भटक रहे हैं, तो कुछ जगहों पर इंटरनेट सेवा नहीं होने से परेशान होना पड़ रहा है।

चयन परीक्षा

20 मई को सुबह होना है श्रमोदय स्कूल में एडमिशन की चयन परीक्षा

20 मई को सुबह 9

बजे से होगी परीक्षा

यह चयन परीक्षा पहले दो बार टल चुकी है। तीसरी बार में 20 मई की तारीख आई है। इसमें भी ऑनलाइन एडमिशन कार्ड निकालने का पेंच आ गया है। बैतूल जिले में करीब 1200 बच्चों ने फार्म भरे थे। इनमें से 1035 बच्चे परीक्षा देने के लिए पात्र हैं।

बच्चों को एडमिशन कार्ड उपलब्ध कराने की जगह वाट्स एप पर दे रहे सलाह

प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के बच्चों को निशुल्क पढ़ाने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम से श्रमोदय आवासीय स्कूल खोला है। 20 मई को परीक्षा होने वाली है, लेकिन इस परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को इंटरनेट कैफे के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शिक्षक वाट्स एप पर एडमिशन कार्ड निकालने की सलाह दे रहे हैं, जबकि बच्चों को एडमिशन कार्ड उपलब्ध कराए जाने थे।

एडमिशन कार्ड देने शिक्षा विभाग को बनानी थी व्यवस्था

आवासीय स्कूल में एडमिशन के लिए चयन परीक्षा 20 मई को होनी है। एडमिशन कार्ड ऑनलाइन निकाले जाने हैं। शिक्षा विभाग को एडमिशन कार्ड बच्चों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करना था। क्योंकि सभी जगह पर स्कूल हैं। श्रम ऑफिस नहीं हैं। इस संबंध में पूर्व में भी कहा था। धम्मदीप भगत, श्रम अधिकारी, बैतूल

बच्चों के फार्म भरवाए थे। अब परीक्षा की डेट आने पर बच्चों के फोन आ रहे थे। इसलिए मैंने खुद 11 बच्चों के नेट से एडमिशन कार्ड डाउन लोड कर उपलब्ध कराए हैं। आनंद साहू, शिक्षक झल्लार स्कूल

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