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पानी की किल्लत दूर करने गांवों में बनवाए टांके, एसई भूपसिंह राज्यस्तर पर सम्मानित

3 वर्ष पहले
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हनुमानगढ़| जिन गांवों में पानी की बेहद किल्लत थी। उन गांवों में पानी के टांके बनाए गए। उन्हें छतों से जोड़ा। जब बारिश होगी तो यह टांके पानी से भर जाएंगे। नतीजा यह हुआ कि यह गांव अब जल संग्रहण और संरक्षण में आत्मनिर्भर बन चुके हैं। इसी काम की बदौलत जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के अधीक्षण अभियंता भूपसिंह को जयपुर में सम्मान मिला है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (ग्रामीण) के द्वितीय चरण में श्रेष्ठ और समय पर कार्य करने के लिए उन्हें यह पुरस्कार शुक्रवार को जयपुर में आयोजित स्टेट लेवल की कार्यशाला में पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने दिया। खास बात ये रही कि भूपसिंह ने तय समय में जिले सात ब्लॉकों के 66 गांवों में पानी के टांके, रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाए, जोहड़, खाले आदि के एक हजार 23 कामों को पूरा किया। इनमें से भू-संरक्षण विभाग के 556 काम शामिल थे। भूपसिंह ने यह काम ऑनलाइन करवाए। इसलिए उन्हें यह सम्मान दिया गया।

बारिश में भरपूर मिलेगा पानी, आत्मनिर्भर हुए गांव, 10-10 हजार लीटर क्षमता के टांके बनवाए

जिले के सात में से तीन ब्लॉक नोहर, रावतसर और भादरा में पानी की कमी देखी तो वहां 10-10 हजार लीटर क्षमता के टांके बनाए गए। घरों की छतों को इन टांकों से जोड़ा ताकि बरसात में यह साल भर तक लोगों को पानी मुहैया करवा सके। एक टांके में दो टैंकर पानी आएगा। यही नहीं इन गांवों में जोहड़ खुदवाए, खाले बनवाए। बारिश के दिनों में इन गांवों में पानी की किल्लत नहीं रहेगी।

सारा काम किया ऑनलाइन

भूपसिंह ने बताया कि यह सारा काम ऑनलाइन किया गया। यानि स्वीकृतियां निकलने से लेकर प्लानिंग और काम पूरा होने तक का सारी गतिविधियां एप(एमजेएसए) से संपन्न की गई हैं। जिले में जिस जगह काम हुआ उसकी लोकेशन और फोटो भी आज गूगल में मौजूद है।

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