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आरटीआई की फाइल गायब, पूर्व गोपनीय प्रभारी की होगी गिरफ्तारी

3 वर्ष पहले
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डीआईजी ऑफिस से आरटीआई से संबंधित फाइल गायब होने के मामले में कार्यालय के पूर्व गोपनीय प्रभारी सिपाही संजय कुमार सिंह को पुलिस ने जांच में आरोपी बनाया है। फाइल गायब करने में पुलिस ने संजय की संलिप्तता बताई है। सिटी डीएसपी ने अपने सुपरविजन में संजय सिंह को दोषी माना है और उसके खिलाफ आपराधिक साजिश और जालसाजी की धाराओं में केस को ट्रू भी कर दिया है। साथ ही आईओ को निर्देश दिया गया है कि एसएसपी का रिपोर्ट-टू प्राप्त कर आरोपी पूर्व गोपनीय प्रभारी संजय सिंह को गिरफ्तार करें।

वर्तमान में संजय सिंह आर्थिक अपराध इकाई, पटना में पदस्थापित हैं। यह मामला जुलाई 2017 में उजागर हुआ था। डीआईजी ऑफिस से आरटीआई से संबंधित फाइल गायब होने के मामले में तत्कालीन गोपनीय प्रभारी प्रमोद पोद्दार ने बरारी थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

आरोपी संजय कुमार सिंह।

आवेदक दीपक राज ने डीआईजी कार्यालय में आरटीआई के तहत आवेदन देकर डीआईजी पूर्वी क्षेत्र भागलपुर के ज्ञापांक 1504/ दिनांक 07 अक्टूबर 2006 का पत्र और राष्ट्रीय उच्च पथ, पूर्णिया अंचल के अधीक्षण अभियंता के ज्ञापांक-844/ दिनांक 22 सितंबर 2006 के पत्र और इससे संबंधित रिमाइंडर की भी छायाप्रति उपलब्ध कराने की मांग की थी।

महिला सिपाही की संलिप्तता पर सबूत के बाद होगा निर्णय

पुलिस ने जांच में पाया कि पूर्णिया के एनएच कॉलोनी, खजांची हाट निवासी दीपक राज ने आईटीआई के तहत कुछ सूचना मांगी थी। पर डीआईजी ऑफिस की फाइल में आवेदन और प्रथम अपील की प्रति उपलब्ध नहीं है। इसके बाद तत्कालीन गोपनीय रीडर राजीव लोचन व डीएसपी एडमिन को दीपक राज के आवेदन और प्रथम अपील से संबंधित फाइल की खोजबीन का निर्देश डीआईजी ने दिया था। खोजबीन के बाद डीएसपी एडमिन ने रिपोर्ट में लिखा कि सामान्य शाखा के प्राप्ति रजिस्टर के क्रम संख्या-1312/दिनांक 28.04.17 में आवेदक दीपक राज के आवेदन का उल्लेख है। जिसे गोपनीय शाखा में दिनांक 29 अप्रैल 2016 को ही प्राप्त कराया गया है। उक्त अवधि में गोपनीय शाखा के प्रभारी सिपाही संजय ही थे। जिला बल की महिला सिपाही रंचू कुमारी आरटीआई शाखा में कार्यरत थी। इनसे पूछताछ में पता चला कि संबंधित आवेदन को संजय को दिया गया था। फाइल गायब होने में डीआईजी ऑफिस के तत्कालीन गोपनीय शाखा प्रभारी की संलिप्तता है। आईओ को महिला सिपाही की संलिप्तता के बिंदु पर सबूत इकट्ठा करने को कहा है।

क्या है मामला

किसने गायब की लेखा परीक्षा की कॉपियां, पता नहीं कर पाई पुलिस

डीआईजी ऑफिस से पूर्व में पुलिस विभाग के लिपिकों की लेखा विभागीय परीक्षा-2015 की कॉपियां (उत्तर पुस्तिका) गायब हो गई थी। इस मामले में कार्यालय के लिपिक मनोहर टोपनो ने 2017 में बरारी थाने में अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि डीआईजी ऑफिस से कापियां किसने गायब की। इस मामले में तत्कालीन डीआईजी उपेंद्र कुमार सिन्हा का भी पुलिस बयान लेगी और यह पता करेगी कि आखिर उन्होंने कॉपियों का बंडल ऑफिस के किस कर्मी को सौंपा था। गौर हो कि परीक्षा में कुल 96 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। 22 नवंबर 2015 को तत्कालीन डीआईजी उपेंद्र कुमार सिन्हा की देखरेख में यह परीक्षा आयोजित की गई थी। प्राथमिकी में उल्लेख है कि परीक्षा से संबंधित संचिका भी डीआईजी के तत्कालीन गोपनीय प्रभारी सिपाही संजय कुमार सिंह को सौंप गया था। नाथनगर के सीटीएस में हुई परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थी बीएमपी-5 के रंधीर कुमार (रोल नंबर 45, रोड कोड ई-5) ने रिजल्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत खुद के अलावा तीन अन्य अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका की मांग की थी।

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