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पीजी कॉलेज में छात्राओं की संख्या बढ़ी तो 2000 से ज्यादा छात्रों को नहीं मिला प्रवेश

3 वर्ष पहले
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कॉलेज लेवल काउंसिलिंग के लिए पीजी कॉलेज में छात्राओं की भीड़ लगी।

आंकड़े एक नजर में

30 प्रतिशत सीटों पर सीएलसी जारी

62 प्रतिशत पर भी नहीं मिली पीजी कॉलेज में एडमिशन, रो दी छात्रा

एक छात्रा को 62% के बाद भी पीजी कॉलेज में बीए मंे प्रवेश नहीं मिला। परेशान होकर छात्रा रोते हुए प्राचार्य देवड़ा के पास पहुंची। प्राचार्य ने आवेदन जमा करवा दिया। बीए क्लोजिंग 70 प्रतिशत के करीब है। एेसे मंे छात्रा काे प्रवेश मिलने की उम्मीद कम ही है।

जनभागीदारी समिति ने दी सीटें बढ़ाने पर सहमति

9500

विद्यार्थियों ने उत्तीर्ण की 12वीं

5664

विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में आए

कॉलेज में ही मंगलवार दोपहर जनभागीदारी समिति सदस्य रवि जायसवाल, राजेश रावत, चंद्रशेखर भालसे और कैलाश मालवीय ने प्राचार्य आरएस देवड़ा के साथ बैठक की। सदस्यांे ने कहा- सीट बढ़ोतरी को लेकर श्रम व कृषि राज्यमंत्री बालकृष्ण पाटीदार से चर्चा की थी। उन्हांेने सीट बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जगह नहीं िमलने के कारण परेशानी आ रही है।

3400

सीटें है पीजी-जीडीसी कॉलेज में

जीडीसी मंे 20 व सबसे ज्यादा बीएससी कम्प्यूटर की 80 फीसदी सीट खाली

जीडीसी मंे सीटें खाली हैं। कॉलेज के हरीश पूरे ने बताया 1000 सीट मंे से 20 प्रतिशत हर साल रिक्त रह जाती है। इस साल भी बीएससी कम्प्यूटर और बीएससी गणित मंे 80 प्रतिशत सीटें खाली हैं। यहां पर यूजी मंे 820 व पीजी में 180 सीटें हैं।

पीजी-जीडीसी में प्रवेश

850 बीए 900 बीएससी 460 बी कॉम (प्रथम वर्ष पीजी-जीडीसी कॉलेज की िमलाकर)

बाहरी छात्राओं के लिए सहज है पीजी कॉलेज

पीजी कॉलेज शहर के बीच मंे होने से छात्राएं यहीं पर प्रवेश लेती हैं। कॉलेज मंे 60 प्रतिशत छात्राएं व 40 प्रतिशत छात्र को प्रवेश िमलता है।

जीडीसी शहर से 5 किमी दूर होने के बाद छात्राएं यहां नहीं जाती। 20 प्रतिशत सीटें रिक्त रह जाती है।

उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का प्रतिशत छात्राओं से बेहतर नहीं होता है, इसलिए काउंसलिंग मंे वे पिछड़ जाते हैं, इससे वे कॉलेज नहीं कर पाते।

भगवानपुरा, झिरन्या और सेगांव मंे कॉलेज नहीं है। ये खरगोन से 40 किमी के दायरे में आते हैं, इसलिए इनके छात्र यहीं पर आते हैं।

विकल्प : ये भी हो सकता है

पीजी कॉलेज को दो शिफ्टों मंे चलाया जाए, अतिथि शिक्षकों की भर्ती करें।

गर्ल्स कॉलेज को पीजी कॉलेज के स्थान पर परिवर्तित करें, पीजी कॉलेज को गर्ल्स कॉलेज।

प्रवेश के लिए भवन तलाशा जाए, अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती करें।

विद्यार्थियांे को प्रवेश के लिए अन्यत्र भवन देखने के निर्देश िदए हैं। अतिथि व्याख्याताओं को भी रखा जाएगा। विद्यार्थियांे को वंचित नहीं रहने देंगे। शशिभूषण सिंह, कलेक्टर खरगोन

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