कांकेर|सामाजिक रीति रिवाज से शादी होने के बावजूद प|ी से जाति मेल नहीं होने का हवाला देकर पति ने प|ी से बातचीत बंद कर दी है। उसे वापस मायके उसके घर भेज दिया। प|ी अब तक यही समझते रही कि जल्द ही पति इन फिजूल की बातों को दरकिनार कर उसे लेने आएगा। लेकिन वह महीनों नहीं आया। नतीजतन प|ी के परिजनों ने सामजिक बैठक बुलाई। पति की बातों को गलत ठहराया गया, लेकिन वह फिर भी पति नहीं माना। उसके वापसी के इंतजार में बैठी प|ी को पांच दिन पूर्व खबर मिली की उसने दूसरी शादी कर ली है। इसके बाद से प|ी अपने व बच्चे का हक पाने दर-दर भटक रही है।
बालोद जिले की युवती अश्वनी पोया की शादी कांकेर जिले के चारामा चारभाटा निवासी ईश्वर नेताम से 2015 में हुई थी। शादी के एक साल बद जब प|ी गर्भवती हुई। पति ने अपनी मर्जी उसे डिलिवरी के लिए उसके मायके भेजा। 2016 में प|ी को पुत्री हुई। लेकिन इसके बाद से जाति पति प|ी के बीच दीवार बन गई। ऐसे में अगस्त 2016 में सामाजिक बैठक में इस मुद्दे को भी रख गया। समाजजनों ने 5 हजार रुपए पति पर जुर्माना भी किया। इसके साथ ही बच्चे को प्रति माह पांच हजार रुपए खर्च देने फैसला लिया दिया गया। एक दो माह खर्च देने के बाद उसने यह रकम भी देना बंद कर दी। पांच दिन पूर्व उसे जानकारी हुई कि 15 मई को उसका पति डोंगरकट्टा भानुप्रतापपुर की एक अन्य युवती से शादी कर ली है।
पति के खिलाफ दूसरी शादी की शिकायत लेकर पहुंची पहली प|ी।
सरकारी कर्मचारी है, अब सेलरी में चाहिए बंटवारा
महिला अश्वनी नेताम ने कहा उसका पति स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी पर है। बिना कानूनी कार्रवाई के वह दूसरी शादी नहीं कर सकता है। उसकी दूसरी शादी गैर कानूनी है। उसके पति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ खर्चे के लिए सैलरी की आधी रकम उसे दी जाए। ताकि वह बच्चे और अपना भरण पोषण कर सके।