जामा मस्जिद के 177 साल पुराने नक्शे के मुताबिक बाकी रह गए निर्माण कार्यों को वक्फ बोर्ड अब पूरा कराएगी।
इस क्रम में जामा मस्जिद वक्फ बोर्ड ने मस्जिद में तीन बरामदे अर्थात बारहदरी बनवाना तय किया है। यह बिलकुल फतहपुर सीकरी की मस्जिद की तर्ज पर होगा। मस्जिद को हेरिटेज लुक कायम रहे इसलिए निर्माण कार्य पूरी तक पिंक स्टोन से होगा। कारीगर भी फतहपुर सीकरी से बुलाए गए हैं, जिन्होंने पत्थरों की कटाई, छंटाई और पच्चीकारी प्रारंभ कर दी है। जामा मस्जिद वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष चौधरी अंसार कुरैशी ने बताया कि दिल्ली की जामा मस्जिद की स्टाइल में बनी इस मस्जिद के पुराने नक्शे में बाजार की तरफ बरामदे यानी बारादरी का भी उल्लेख था, किन्ही कारणों से उस समय निर्माण नहीं हो पाया। कमेटी ने इस बकाया काम को कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत 10 गुणा 30 फीट के तीन बरामदे बनवाए जाएंगे। यह बारहदरी की स्टाइल में होंगे। यानी चारों ओर से खुले हुए। जिसमें कोई भी व्यक्ति विश्राम कर सकेगा तथा धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग किया जा सकेगा। इस दौरान बाजार की तरफ क्षतिग्रस्त हो चुके छज्जों की भी मरम्मत कराई जाएगी।
इस संबंध में दुकानदारों को साइन बोर्ड हटाने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि जामा मस्जिद और गंगा मंदिर का निर्माण महाराजा बलवंत सिंह के कार्यकाल में 1261 हिजरी यानी सन् 1841 में हुआ था। यह करीब 90 साल में बनकर तैयार हुई। इसका निर्माण दिल्ली जामा मस्जिद की तर्ज पर हुआ है।
पुराने नक्शे में भी था प्रावधान अब वक्फ बोर्ड देगी हैरिटेज रूप, फतहपुर सीकरी की तर्ज पर
खंभों और महराब पर होगी पच्चीकारी
जामा मस्जिद में बनने वाली बारहदरी हेरिटेज लुक में होगी। इसके खंभे और मेहराबों पर पच्चीकारी की जाएगी। इनमें फूल, पत्ती एवं अन्य डिजाइन बनाई जा रही हैं। खंभे मुगल और राजपूत स्थापत्य शैली में तैयार किए जाएंगे। अध्यक्ष अंसार कुरैशी ने बताया कि मस्जिद के पुराने स्वरूप के अनुसार ही कार्य कराया जा रहा है। कारीगरों ने इसके लिए पत्थरों की कटिंग प्रारंभ कर दी है। पच्चीकारी भी की जा रही है। इसके अलावा मस्जिद के बीच में फव्वारा भी लगाया जाएगा। इसके लिए सिकंदरा में तैयार कुछ फव्वारे देखे हैं।