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कचरे से बच्चे को खाना खाते देखा ताे खिचड़ी बांटने लगे

3 वर्ष पहले
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जो समय लोगों के पूजा-पाठ और ज्ञान-ध्यान का होता है उस समय 65 वर्षीय व्यवसायी मोहनलाल माहेश्वरी सब्जी काटने, बर्तनों को साफ करने तथा खिचड़ी पकाने में व्यस्त रहते हैं। माहेश्वरी प्रतिदिन 80 किलो खिचड़ी तैयार करते हैं और उसे बच्चों और असहाय लोगों को नि:शुल्क वितरित किया जाता है। इसका नाम उन्होंने बालभोग रखा है। इसके पीछे की कहानी मार्मिक है। चार माह पहले उन्होंने रणजीत नगर में एक शादी समारोह स्थल के बाहर कचरे के ढेर में तीन बच्चों को खाना बीन कर खाता देखा तो मन द्रवित हो गया। तभी प्रण लिया कि ऐसे बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए। उन्होंने तत्काल बच्चों के लिए बाल भोग खिचड़ी वितरण करने का निर्णय लिया। कुछ साथियों को जोड़ा और 1 दिसंबर 2017 से नई मंडी स्थित आफिस से खिचड़ी वितरण की जा रही है। करीब 80 किलो खिचड़ी करीब 250 से 300 लोगों को वितरित होती है। कोई भी राहगीर मांग बैठता है तो उसे मना नहीं किया जाता।

समाजसेवा

65 वर्षीय मोहन माहेश्वरी 80 किलो खिचड़ी रोज पकाते और लोगों को निशुल्क बांटते हैं

अवसर विशेष पर अलग मीनू

अवसर विशेष पर मीनू चेंज किया जाता है। एकादशी पर चावल का निषेध होने पर छोले व ब्रेड वितरित की जाती है। हनुमान जयंती, गणेश महोत्सव आदि पर पूडी, सब्जी व बूंदी का वितरण किया जाता है। समाज सेवी मोहन लाल माहेश्वरी ने बताया कि इस कार्य में डायमंड क्लब अध्यक्ष राजेन्द्र सिंघल, ओमप्रकाश गुप्ता, राकेश गुप्ता, राकेश बंसल, सुभाष चंद, अमरजीत सिंह जघीना आदि सहयोगी रहते हैं।

सुपरफूड है खिचड़ी: 80 फीसदी न्यूट्रीशियन : चिकित्सक

खिचड़ी में दाल, चावल और मौसमी सब्जियों का मिश्रण होता है। प्राकृतिक चिकित्सक वीरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि खिचड़ी ही एक मात्र ऐसा व्यंजन है, जिसमें फास्फोरस, मैग्निशियम, विटामिन डी-12, फाइबर और मिनरल होता है। खिचड़ी को अगर गुड अथवा शहद के साथ खाया जाए तो कार्बोहाड्रेट भी मिलता है जो संपूर्ण भोजन है। खिचड़ी से 80 प्रतिशत न्यूट्रीशियन मिलता है। इससे हड्डी और आंत को ताकत मिलती है। सुपाच्य होने के कारण एसिडिटी की कतई शिकायत नहीं होती। भारतीय व्यंजन में खिचड़ी सुपर फूड है।

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