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सुजान गंगा नहर का निखरेगा स्वरूप, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनी, एएसआई ने दी सैद्धांतिक मंजूरी
विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भरतपुर की सुजान गंगा नहर एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह यह है कि अब पर्यटन विभाग के माध्यम से इसका स्वरूप निखारने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवाई गई है। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने भी इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सलाहकारों की तीन सदस्यीय टीम इस नहर का सर्वे भी कर चुकी है। इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर एएसआई से सुजान गंगा नहर के जीर्णोद्धार कार्यों की अनुमति मांगी गई है। इसमें किले की मोट वॉल की मरम्मत, नहर में गंदे पानी को रोकना और उसमें साफ पानी भरने की प्राथमिकता रहेगी।
पर्यटन विभाग के सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय पर्यटन मंत्री के. जे. अल्फांस 23 अप्रैल को किसी अन्य काम से जयपुर आने वाले हैं। उस दिन उनकी मुख्यमंत्री वसुंधराराजे से भी मुलाकात होने की संभावना है। इसलिए, इस दिन मौके का फायदा उठाते हुए भरतपुर की सुजान गंगा नहर मुद्दे पर भी बात की जा सकती है। सुजान गंगा का मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा है। स्थानीय एडवोकेट श्रीनाथ शर्मा कई साल से इसकी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अभी भी यह मुद्दा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लंबित चल रहा है। ज्ञात रहे इसी साल गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान विधायक विजय बंसल के आग्रह पर सीएम वसुंधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री के. जे. अल्फांस और एएसआई के उच्चाधिकारियों ने बात की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर केंद्र सरकार के पास बजट की कमी हो तो राज्य सरकार अपनी ओर से वित्तीय मदद देने को तैयार है। इसके बाद पर्यटन विभाग के अफसरों ने एएसआई की महानिदेशक (डीजी) ऊषा शर्मा से इस बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
फौरी तौर पर उनके सामने नहर की वर्तमान स्थिति और संभावित सुधार को लेकर सुझाव रखे। इस पर ऊषा शर्मा ने भी अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।अब पिछले सप्ताह ही सलाहकार कविता जैन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने इसकी डिटेल रिपोर्ट तैयार की है। राज्य के पुरातत्व विभाग के तकनीकी अधिकारी ने भी रिपोर्ट के लिए डाटा तैयार किया है। इसमें कहां और कितना डैमेज हुआ है, इसकी जानकारी शामिल की है। रिपोर्ट पर चर्चा के बाद एएसआई की टीम अपनी राय देगी।
पर्यटन विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने आकर किया निरीक्षण
सुजान गंगा में 7 जगह टूटी है मोट वॉल
नहर की मोट वॉल 7 जगह से टूटी है। इसमें चौबुर्जा, धोबीघाट, गोपालगढ़, सफेद कोठी के सामने, केतन गेट, पाई बाग और खिरनी घाट प्रमुख हैं। जबकि 35 से ज्यादा स्थानों पर मोट वॉल की तत्काल मरम्मत कराए जाने की जरूरत है। एएसआई के अधीन आने वाले पुरातात्विक महत्व के स्मारकों के एक सौ मीटर की परिधि में कोई निर्माण या सुधार कार्य नहीं करवाए जा सकते। नियमों में यह भी प्रावधान है कि दो सौ मीटर की दूरी पर भी काम कराने के लिए एएसआई से अनुमति लेनी होगी। अब एएसआई ने सुधार के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है।
भास्कर नॉलेज
1733 में बनी थी 2.9 किमी नहर
किले की सुरक्षा के लिए 1733 ईस्वी में सुजान गंगा नहर का निर्माण शुरू हुआ था। यह 8 साल में बनकर तैयार हुई। इसमें 650 कारीगरों ने रात-दिन काम किया। नहर 2.4 वर्ग किलोमीटर में फैले किले के चारों ओर करीब 2.9 किलोमीटर लंबी है। यह करीब 200-250 फुट चौड़ी और करीब 30 फुट गहरी है। किले की दीवार को फोर्ट वॉल और दूसरी दीवार को मोट वॉल कहा जाता है। फोर्ट वॉल के संरक्षण के लिए भी काम करना इस प्रोजेक्ट में शामिल होगा।
भास्कर संवाददाता | भरतपुर
विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भरतपुर की सुजान गंगा नहर एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह यह है कि अब पर्यटन विभाग के माध्यम से इसका स्वरूप निखारने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवाई गई है। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) ने भी इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सलाहकारों की तीन सदस्यीय टीम इस नहर का सर्वे भी कर चुकी है। इस टीम की रिपोर्ट के आधार पर एएसआई से सुजान गंगा नहर के जीर्णोद्धार कार्यों की अनुमति मांगी गई है। इसमें किले की मोट वॉल की मरम्मत, नहर में गंदे पानी को रोकना और उसमें साफ पानी भरने की प्राथमिकता रहेगी।
पर्यटन विभाग के सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय पर्यटन मंत्री के. जे. अल्फांस 23 अप्रैल को किसी अन्य काम से जयपुर आने वाले हैं। उस दिन उनकी मुख्यमंत्री वसुंधराराजे से भी मुलाकात होने की संभावना है। इसलिए, इस दिन मौके का फायदा उठाते हुए भरतपुर की सुजान गंगा नहर मुद्दे पर भी बात की जा सकती है। सुजान गंगा का मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा है। स्थानीय एडवोकेट श्रीनाथ शर्मा कई साल से इसकी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अभी भी यह मुद्दा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लंबित चल रहा है। ज्ञात रहे इसी साल गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान विधायक विजय बंसल के आग्रह पर सीएम वसुंधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री के. जे. अल्फांस और एएसआई के उच्चाधिकारियों ने बात की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर केंद्र सरकार के पास बजट की कमी हो तो राज्य सरकार अपनी ओर से वित्तीय मदद देने को तैयार है। इसके बाद पर्यटन विभाग के अफसरों ने एएसआई की महानिदेशक (डीजी) ऊषा शर्मा से इस बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
फौरी तौर पर उनके सामने नहर की वर्तमान स्थिति और संभावित सुधार को लेकर सुझाव रखे। इस पर ऊषा शर्मा ने भी अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है।अब पिछले सप्ताह ही सलाहकार कविता जैन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने इसकी डिटेल रिपोर्ट तैयार की है। राज्य के पुरातत्व विभाग के तकनीकी अधिकारी ने भी रिपोर्ट के लिए डाटा तैयार किया है। इसमें कहां और कितना डैमेज हुआ है, इसकी जानकारी शामिल की है। रिपोर्ट पर चर्चा के बाद एएसआई की टीम अपनी राय देगी।
मुद्दे पर फिर होगी चर्चा
कंसलटेंट टीम ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, जल्द शुरू होंगे कार्य : दिलीप सिंह
पयर्टन विभाग के पैनल कंसलटेंट टीम ने पिछले हफ्ते नहर की रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट मुख्यालय ने एएसआई को भेज दी है। जिसमें मोट वॉल, फोर्ट वॉल की मरम्मत, गंदे पानी की आवक को रोकना और स्वच्छ जल की आपूर्ति का प्रस्ताव है। -दिलीप सिंह, क्षेत्रीय निदेशक पर्यटन
स्थानीय विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी: जिला कलेक्टर
राज्य सरकार ने पर्यटन विभाग के माध्यम से सुजान गंगा नहर के जीर्णोद्घार की योजना बनाई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री वसुंधराराजे की केंद्रीय मंत्री के. जे. अल्फांस से बात की थी। उन्होंने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है। पर्यटन विभाग की टीम नहर का निरीक्षण भी कर चुकी है। जिला प्रशासन की ओर से पर्यटन विभाग को इस काम में स्थानीय विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। - डॉ.एन. के. गुप्ता, जिला कलेक्टर
केंद्रीय पर्यटन मंत्री के. जे. अल्फांस से 23 को जयपुर में हो सकती है वार्ता
ये है प्रस्तावित कार्य
सुजान गंगा नहर के चारों और मोट वॉल को सुधारा जाएगा। जरूरत और अनुमति के हिसाब से मरम्मत के काम कराए जाएंगे। नहर से जुडे़ गंदे नालों को बंद अथवा उनका निकास दूसरी जगह से किया जाएगा। नहर की सफाई और उसमें साफ पानी भरने की व्यवस्था की जाएगी। हालांकि गंदे पानी की आवक को कुछ हद तक रोका गया है। फिर भी इसके स्थाई समाधान की कार्य योजना तैयार होगी।