22 साल बाद चले फव्वारे ढाई महीने में ही हो गए बंद
किला स्थित राजकीय संग्रहालय में रियायत कालीन चमन बगीची के फव्वारे 22 साल बाद मुख्यमंत्री के आगमन पर 25 जनवरी को शुरू तो हुए, लेकिन ढाई महीने चलने के बाद ही बंद हो गए। ये फव्वारे मार्च मध्य से बंद पड़े हैं। संग्रहालय अधीक्षक की ओर से इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को दी जा चुकी है। लेकिन, कहीं कोई सुनवाई नहीं है। उल्लेखनीय है कि पर्यटन विभाग ने राजकीय संग्रहालय में 3.88 करोड़ की लागत से मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के कार्य कराए हैं। इस राशि से चमन बगीची के फव्वारों को भी शुरू किया गया, जिसका उद्घाटन सीएम ने किया था। चार बाग पद्घति पर चमन बगीची के फव्वारों में लगी रंगीन लाइटों ने संग्रहालय के स्थापत्य का सौंदर्य दोगुना कर दिया था। इससे पर्यटकों की संख्या में चौगुना से ज्यादा इजाफा हुआ। लेकिन, ये फव्वारे ढाई महीने भी नहीं चल पाए। इनमें कचरा आने और मोटर के काम नहीं करने की शिकायत आ गई है। इस कारण फव्वारे नहीं चल रहे हैं। इस संबंध में संग्रहालय अधीक्षक सोहन सिंह चौधरी ने बताया कि मंत्री, संभागीय आयुक्त एवं विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया है। ठेकेदार को भी बता दिया गया है, किंतु अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। फव्वारे नहीं चलने से लोगों को निराशा होती है।
चिंता
मुख्यमंत्री वसुंधराराजे का है ड्रीम प्रोजेक्ट, उनके भरतपुर दौरे के समय जनवरी में शुरू हुए थे फव्वारे
जाट-मुगल स्थापत्य शैली के हैं फव्वारे
भरतपुर के राजाओं ने डीग के विश्व प्रसिद्ध फव्वारों की तरह तत्कालीन कचहरी में भी फव्वारों लगवाए थे। जिनका सिस्टम डीग की तरह मैन्युअल था। जिसमें छत पर बने टेंक से फव्वारे जुड़े हुए थे। किंतु देखरेख के अभाव में फव्वारे खराब हो गए। इन्हें तीन बार सही करने का प्रयास हुआ, किंतु सफलता नहीं मिली। अभी भी निर्माण एजेंसी ने फव्वारों के सहारे पाइप लाइन और फव्वारे लगा दिए हैं, जो प्रथम दृष्टया दिखाई नहीं देते। निर्माण एजेंसी आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण को रियासतकालीन फव्वारों को ही चालू करना था। किंतु प्राधिकरण मौजूदा व्यवस्था को ही लागू नहीं कर पा रहा है। बरामदों में लगे फव्वारों को तो चालू ही नहीं किया है।