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पानी की चोरी न हो इसलिए चंबल प्रोजेक्ट के हाइड्रेंट बोर्ड पर लिखा- यह पानी पीने का नहीं है

3 वर्ष पहले
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भरतपुर. शहर के गांव मलाह के निकट चंबल प्रोजेक्ट है। यहां गेट के निकट जलदाय विभाग ने एक हाइड्रेंट बना रखा है। लंबे समय से इस हाइड्रेंट से आम लोग टैंकर में भरकर पीने को पानी ले जाते थे। लेकिन विभाग को इससे परेशानी पैदा हुई तो हाइड्रेंट के निकट एक खंभा पर बोर्ड लगा दिया गया। जिस पर लिख दिया कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। ताकि लोग वहां से पानी भरकर न ले जाएं। जबकि हकीकत यह है कि हाइड्रेंट का पानी पीने योग्य है। जहां से अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों के यहां टैंकरों से पानी ले जाया जाता है। बताते चलें कि जिले में भूजल अत्यधिक खारा है। इसलिए आमजन को पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दृष्टि से जलदाय विभाग ने चंबल-धौलपुर- भरतपुर पेयजल परियोजना बनाई। प्रथम चरण में मूल स्वीकृति 166.50 करोड़ रुपए की वर्ष 1999 में जारी की गई थी एवं संशोधित स्वीकृति 548.68 करोड़ रुपए की वर्ष 2013 में जारी की गई। इस स्वीकृति के तहत चंबल धौलपुर से भरतपुर तक मुख्य ट्रांसमिशन मेन, जलशोधन संयंत्र एवं स्वच्छ जलाशयों को निर्माण कराया गया। इस संबंध में आईवीआरसीएल के चंबल प्रोजेक्ट मैनेजर रविंदरन का कहना है पूर्व में यहां से अग्निशमन वाहनों में पानी भरने की व्यवस्था थी, इसलिए यह बोर्ड लगाया गया था, लेकिन उसे हटाना भूल गए हैं।

भरतपुर. बोर्ड पर लिखा यह पानी पीने योग्य नहीं है।

हाइड्रेंट से पानी भरता मिलट्री का टैंकर।

मलाह हैडवर्क्स पर लगा जलशोधन संयंत्र।

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