पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • तापमान बढ़ा तो बदली बिहारीजी की दिनचर्या

तापमान बढ़ा तो बदली बिहारीजी की दिनचर्या

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
मौसम बदलने के साथ ही मंदिर किला स्थित बिहारी जी की दिनचर्या में बदलाव आ गया है। अब उनके खानपान और पहनावे में भी परिवर्तन किया गया है। दिन में विश्राम का समय बढ़ गया है। खानपान में शीतल व्यंजन को महत्व दिया जाने लगा है। शुरुआत अक्षय तृतीया से हो गई है। बुधवार को ठाकुरजी ने चंदन चोला धारण किया। जिसमें ठाकुरजी का 6 किलो चंदन से श्रंगार किया गया। इसके साथ ही प्रतिदिन चंदन का लेप होगा। ताकि शीतलता बनी रहे। पहनावे में अब धोती-कुर्ता और अंगरखा को प्रमुखता दी जाएगी। गर्भ गृह में लगा एसी भी चलाया गया है। साथ ही रूम कूलर का भी इंतजाम किया गया है। प्रसादी में भी बदलाव हुआ है। बालभोग, राजभोग और रात्रि भोज में अब शीतल पेय एवं व्यंजन परोसे जाने लगे हैं। मसलन, सुबह लस्सी, छाछ, मिल्करोज व फल, राजभोग में कढ़ी, दाल, चावल, खिचड़ी, फल, उत्थापन में ठंडा दूध, लस्सी, खरबूज, तरबूज, आम एवं अन्य फल तथा रात्रि में दूध, रबड़ी व ठंडे रसगुल्ले और बाद में पिपरमेंट का पान चढ़ाया जा रहा है। पीने के पानी के लिए कुंजा मंगाया गया है। इसके अलावा हाथ का पंखा यानी बीजना भी मौजूद रहेगा। पंडित मनोज भारद्वाज ने बताया कि सनातन धर्म में ठाकुरजी की सेवा मनुष्य रूप में की गई है। इसलिए मानव जीवन में जिस प्रकार के बदलाव आते हैं वैसे ही हम ठाकुरजी के भोग, राग और श्रंगार में करते हैं।

मंगला दर्शन सुबह 5 बजे: किला स्थित बिहारी जी मंदिर के टाइम टेबल में भी बदलाव हो गया है। सुबह आधा घंटे पहले तथा शाम को आधा घंटे देर से मंदिर के पट खुलने लगे हैं। यह क्रम शरद के नवरात्रा तक रहेगा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार मंगला दर्शन सुबह 5 से 6.30 बजे, श्रंगार सुबह 8.30 से 9.45 तक तथा शयन आरती सुबह 10.30 बजे।

आखातीज पर ठाकुरजी का 6 किलो चंदन से हुआ शृंगार, खानपान और पहनावे में भी किया गया बदलाव

बिहारी जी मंदिर में चंदन चोला के दर्शन।

खबरें और भी हैं...