भरतपुर शहर को स्वच्छ रखने के लिए नगर निगम हर साल 18 करोड़ रुपए से भी ज्यादा राशि खर्च करता है। इसके बावजूद देश के सबसे स्वच्छ 51 शहरों में भी जगह नहीं बना सका है। केन्द्र सरकार ने बुधवार को ही विभिन्न श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ 51 शहरों की सूची जारी की है। करीब 4203 शहरी निकायों में करवाए गए स्वच्छता सर्वेक्षण का अभी पहले स्तर का रुझान जारी किया गया है।
इसमें केंद्र सरकार की ओर से जारी 23 अवार्डों में भरतपुर शामिल नहीं है। जबकि प्रदेश से कोटा को इंडिया बेस्ट सिटी इन सिटी फीडबैक का अवार्ड दिया गया।इधर, स्वच्छ शहरों में भरतपुर का नाम नहीं होने की बड़ी वजह यही मानी जा रही है कि केंद्रीय टीम को शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर मिले थे। लोगों को डस्टबिन के बारे में जानकारी तक नहीं थी। कई कॉलोनियां ऐसी मिलीं. जिनमें अभी भी लोग खुले में शौच करने जाते हैं। जबकि भरतपुर के सभी वार्ड ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। सिटीजन फीडबैक भी अच्छा नहीं मिला। अब 20 मई को जारी होने वाली शेष शहरों की सूची में भरतपुर के नाम शामिल होने की उम्मीद है।
पहले भी पिछड़े थे, लेकिन नहीं लिया सबक
ठोस कचरा प्रबंधन
1. ठोस कचरा निस्तारण के लिए नोंह में करीब 10 साल पहले प्लांट बना है। लेकिन. काफी से खराब है। इसलिए री-साइकिलिंग नहीं होने से कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही है।
सीवरेज प्लांट
4. सीवरेज प्लांट वर्ष 2016 में शुरू होना था। अभी तक काम अधूरा है। इससे प्रभाव पड़ रहा है।
मैन पॉवर
2. मापदंड के अनुसार 1000 लोगों पर 4 सफाई कर्मचारी होने चाहिए। करीब साढ़े तीन लाख की आबादी होने के बाद भी स्थायी कर्मी केवल 301 हैं जिनमें भी 46 सवर्ण जाति के हैं। इनमें भी ज्यादातर अफसरों के घर अथवा आफिस में काम कर रहे हैं।
अब अगली सूची पर अफसरों की निगाहें...
निगम के स्वच्छता प्रभारी एईएन प्रदीप मिश्रा को उम्मीद है कि 20 मई को जारी होने वाली शेष शहरों की सूची में भरतपुर का नाम आ सकता है। नेता प्रतिपक्ष इंद्रजीत भारद्वाज का कहना है कि भरतपुर निगम की हालत वैसे ही है जैसे कि मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की। सालाना 18 करोड़ खर्च करने के बाद भी 51 तो छोडि़ए अगर हम पहले 151 शहरों में भी आ जाएं तो तब कहना।
2700 की टीम ने लिया 40 करोड़ लोगों से फीडबैक
स्वच्छ भारत मिशन के तहत केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 के तहत 4203 शहरी निकायों का मूल्यांकन किया। जिसमें करीब 2700 लोगों की टीम ने 37.66 लाख लोगों से संबंधित निकायों का फीडबैक लिया। सर्वेक्षण 4 जनवरी से 10 मार्च तक चला। स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान 53.58 लाख स्वच्छता एप डाउनलोड किए गए।
डोर टू डोर कचरा कलेक्शन
3. शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए 50 ऑटो ट्रिपर लगाए गए हैं, लेकिन बहुत सी जगहों पर इनकी भी केवल खाना पूर्ति हो रही है। विशेषकर शहर के बाहरी इलाकों में। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों को जागरुक भी किया गया।