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जन्मतिथि गलत की, सीबीएसई अब देगी जुर्माना

3 वर्ष पहले
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अदालत ने विद्यार्थी की जन्म तिथि गलत अंकित करने पर एडीजे संख्या-3 की अदालत ने सीबीएसई पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए जन्म तिथि सही करके संशोधित अंकतालिका तथा प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए हैं।

गांव परसवारा नदबई निवासी सौरभ कुमार शर्मा ने अपने पिता गौरीशंकर शर्मा के जरिए एक वाद अदालत में पेश किया। इसमें बताया कि उसकी वास्तविक जन्म तिथि 8 अगस्त 1999 है। परंतु किसी स्तर पर विद्यालय की लिपिकीय त्रुटि के कारण उसकी जन्मतिथि 8 अगस्त 1997 सहवन से अंकित हो गई। उसी के आधार पर वादी को माध्यमिक विद्यालय परीक्षा की जारी अंकतालिका ने वादी की जन्मतिथि 8 अगस्त 1997 दर्ज कर दी। वादी को जब इस तथ्य का पता लगा तो उसने गलत जन्म तिथि को शुद्ध कर जन्म तिथि को सही अंकित किए जाने का आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर विद्यालय ने लिपिकीय त्रुटि को स्वीकार किया और सीबीएसई अजमेर को वादी की जन्म तिथि 8 अगस्त 1997 के स्थान पर 8 अगस्त 1999 शुद्ध करने की अनुशंसा की। इसके बाद वादी सीबीएसई अजमेर मिला तो उन्होंने भी वादी का परीक्षण करके आश्वासन दिया और कहा कि त्रुटि को शीघ्र शुद्ध करके विद्यालय भेज दिया जाएगा। परंतु उन्होंने सही नहीं की।

न्यायाधीश बालकृष्ण मिश्रा ने सुनवाई करके निर्णय दिया कि सीबीएसई दिल्ली के सचिव व सीबीएसई अजमेर के क्षेत्रीय निदेशक को आदेश दिए कि वह वादी के अंकतालिका सहित सभी सुसंगत प्रमाण पत्रों के अभिलेखों में जन्म तिथि को दुरुस्त करते हुए 8 अगस्त 1997 के स्थान पर 8 अगस्त 1999 अंकित करें एवं शुद्ध और संशोधित अंकतालिका व प्रमाण पत्र जारी करें। साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है और कहा है कि सीबीएसई अजमेर के क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय में 20 मई 2014 से 19 मई 2015 के मध्य कार्यरत अनुभाग अधिकारी जुर्माना के लिए व्यक्तिगत उत्तरदायी होगा।

निर्णय
संशोधित जन्म तिथि वाली अंकतालिका और प्रमाण पत्र देने के निर्देश, नदबई के परसवारा गांव का है छात्र
न्यायालय ने निर्णय में यह भी टिप्पणी की
न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि वादी एक छात्र है और उसे उस त्रुटि का खामियाजा भुगतना पड़ा है, जिस त्रुटि को दुरुस्त करने के लिए प्रतिवादी सीबीएसई अजमेर एक मात्र रूप से जिम्मेदार है। जिसकी लापरवाही से अनावश्यक तौर पर विधिक कार्यवाहियों में उलझना पड़ा है और मानसिक रूप से परेशान होना पड़ा है। जिस समय विद्यार्थी सौरभ को अपने भविष्य सुधारने के लिए पढ़ाई करनी थी, उस समय वह अपने जन्मतिथि को सुधरवाने के लिए कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहा है, इसलिए जुर्माना लगाना उचित है। वादी की ओर से पैरवी संभव कुमार जैन एडवोकेट ने की।

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