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जेल में महिला बंदियों और उनके बच्चों का संरक्षण व संवर्धन जरूरी: डीजे शर्मा

3 वर्ष पहले
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं डीजे सुरेन्द्र मोहन शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को कार्यशाला हुई। कार्यशाला में उन्होंने कहा कि जेल में महिला बंदियों व उनके बच्चों का संरक्षण व संवर्धन आवश्यक है। अपराध के परिणामस्वरूप जेल में रहना एक अलग बात है, लेकिन महिला होने के नाते व बच्चों के जो प्राकृतिक अधिकार हैं उनका संरक्षण करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। इसमें सीजेएम राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि महिलाओं की स्थिति पुरुषों की अपेक्षा काफी दयनीय होती है। वे अपने अधिकारों का संरक्षण करने में असमर्थ होती हैं। इसके संबंध में कमेटी का गठन किया है।

कमेटी के सदस्य 17 मई से 26 मई तक जेल में चर्चा करेंगे तथा फार्म भरकर सभी सूचनाएं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रेषित करेंगे। मुख्य वक्ता अधिवक्ता राकेश सिंह, केन्द्रीय कारागृह के अधीक्षक राकेश मोहन शर्मा, पूर्णकालिक सचिव संतोष कुमार मीणा आदि ने भी संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि जिले के सभी न्यायालयों में कुल 202 पैनल अधिवक्ता नियुक्त किए हैं। इनका कार्यकाल अधिकतम 3 वर्ष तक रहेगा। विधिक सेवा समिति की ओर से अधिवक्ता निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है।

भरतपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यशाला में उपस्थित लोग।

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