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मेयर का डैमेज कंट्रोल... कुणाल की 5 बहनों के नाम कराएंगे 21-21 हजार रुपए की एफडी
सांड के हमले में मृत 5 वर्षीय कुणाल की मौत के बाद डैमेज कंट्रोल में जुटे मेयर शिव सिंह भोंट ने अब अपनी तरफ से उसकी 5 बहनों के नाम 21-21 हजार रुपए की एफडी करवाने का फैसला किया है। इस बीच, आर्थिक सहायता राशि 4 लाख रुपए का चैक उन्होंने कुणाल के घर जाकर उसके पिता जुगल किशोर को सौंप दिया। इससे पहले लोगों का आक्रोश कम करने और राजनीतिक संकट टालने के उद्देश्य से मेयर ने घटना वाले दिन ही बोर्ड की आपात मीटिंग बुलाकर कुणाल के परिवार को 20 लाख रुपए की सहायता राशि दिलाए जाने का प्रस्ताव पारित करवा लिया था। लेकिन, नियमों में इस तरह मदद देने का कोई प्रावधान नहीं होने के कारण शहरभर में भाजपा सरकार और मेयर की जबरदस्त किरकिरी हुई थी।
बुधवार को फिर कुणाल के घर पहुंचे मेयर शिव सिंह भोंट ने कहा कि उसके पिता से मिलकर घटना पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि वे अपनी तरफ से कुणाल की सभी 5 बहनों के नाम जल्द ही बैंक में 21-21 हजार रुपए की एफडी कराएंगे। इधर, राजनीतिक हलकों में मेयर के इस कदम को 15.50 लाख रुपए का मुआवजा न मिल पाने की भरपाई के रूप में देख रहे हैं। क्योंकि नगर निगम द्वारा लिए गए प्रस्ताव को डीएलबी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। मेयर के इधर-उधर से फोन कराने के बाद भी डीएलबी डायरेक्टर ने उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं दी। इसलिए मेयर ने सांत्वना स्वरूप अपनी ओर से एफडी कराने की घोषणा की है। क्योंकि जुगल जाटव राशि नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दे चुका था। फिलहाल, जुगल ने मेयर द्वारा उपलब्ध कराई गई सहायता राशि पर सहमति और संतुष्टि जताई है। उसने बताया कि मेयर ने निगम के सभी पार्षदों से एक माह का वेतन और कर्मचारियों से एक दिन के वेतन की राशि 5 जून तक दिलवाने का आश्वासन दिया है। इस मौके पर पार्षद मोती सिंह जाटव, सर्वजातीय महापंचायत के संयोजक गिरधारी तिवारी आदि मौजूद थे।
भरतपुर। सांड के हमले में मृतक कुणाल के पिता को सहायता राशि का चैक देते मेयर शिव सिंह व अन्य।
आवारा गोवंश पकड़ने को नगर निगम ने फिर किए टेंडर
भरतपुर। शहरी नागरिकों को आवारा सांडों के आतंक से मुक्त कराने के लिए नगर निगम ने फिर से कागजी घोड़े दौड़ाना शुरू कर दिया है। निगम ने आवारा गोवंश, सांड, गाय, बछड़ा अादि को पकड़कर टैग लगाकर आश्रय स्थल में भिजवाने तथा पकड़े गए गोवंश को आश्रय स्थल से परिवहन कर अन्य गोशालाओं तक पहुंचाने के लिए 15 लाख रुपए की निविदा जारी की है। यह निविदा 28 मई की शाम 3 बजे खोली जाएगी। बताते चलें कि पूर्व में निगम की ओर से आवारा गोवंश पकड़ने का ठेका दिया गया था। लेकिन ठेकेदार अशोक जैन ने पूरे साल आवारा गोवंश पकड़ने में उदासीनता बरती। वहीं, जिम्मेदार नगर निगम के अधिकारी सीएसआई संजय सिंह ने आवारा गोवंश को पकड़वाने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। उनकी लापरवाही का खामियाजा आमजन को आवारा गोवंश के हमले का शिकार होकर झेलना पड़ा। इधर पहले का ठेका समाप्त होने से पूर्व ही फिर नगर निगम की ओर से ठेका के लिए निविदा जारी कर दी गई है। इससे ऐसा लगता है कि निगम कागजी कार्यवाही में अपने आपको पूरी तरह से दुरुस्त कर काम कर रही है।
निगम की मॉनीटरिंग कमजोर, ठेकेदार करते हैं मनमानी
निगम की ओर से ठेका तो बड़ी आसानी से कर दिया जाता है, लेकिन निगम की मॉनिटरिंग बेहद कमजोर है। इसका परिणाम यह है होता है कि ठेकेदार पूरी तरह से मनमानी करते हैं। ठेकेदार और संबंधित मॉनिटरिंग अधिकारी व कर्मचारी की मिलीभगत के कारण जहां सरकारी धन की बर्बादी होती है, वहीं आमजन को समय पर काम पूरा नहीं होने या घटिया काम होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आज गौशाला प्रबंधकों से बात करेंगे कलेक्टर संदेश नायक
इधर, शहर में आवारा गोवंश की समस्या को लेकर जिला कलेक्टर संदेश नायक गुरुवार को जिले की सभी 9 गौशालाओं के प्रबंधकों से बात करेंगे। उनसे बात करके गोवंश को उन गौशालाओं में भिजवाने का प्लान तैयार किया जाएगा। जिला कलेक्टर नायक ने बताया कि गुर्जर आंदोलन से अब फुर्सत मिली है। गुरुवार को सभी गौशाला प्रबंधकों से बात कर क्षमता के अनुसार गोवंश भिजवाने की व्यवस्था की जाएगी।