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स्टेशन पर अब देवस्थान विभाग की धर्मशाला में शुरू हुई अवैध पार्किंग

3 वर्ष पहले
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रेलवे स्टेशन के पास अब देवस्थान विभाग की सरकारी धर्मशाला में अवैध पार्किंग शुरू हो गई है। दरअसल, रेलवे स्टेशन के बाहर चल रही अवैध पार्किंग रेलवे ने हाल ही बंद की है। आस पास के लोगों ने इसी का फायदा उठाना शुरू कर दिया है। देवस्थान विभाग की जिस धर्मशाला में अवैध पार्किंग कराई जा रही है, वह राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी की है। इसमें करीब 6 परिवार लंबे समय से बतौर किराएदार रह रहे हैं।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि रियासतकाल में भरतपुर रेलवे स्टेशन जंगल में था। उस समय यात्रियों को ठहरने के लिए स्टेशन के आसपास कोई जगह नहीं थी। चारों ओर घना जंगल होने से शहर तक आने में डर लगता था। तब यात्री किशन शाला धर्मशाला में ही ठहर जाते थे। इस धर्मशाला का निर्माण तत्कालीन महाराजा किशन सिंह ने किशन शाला के नाम से कराया था। ये धर्मशाला करीब 200 साल पुरानी है। इसमें कई दशक से 6 परिवार रह रहे हैं। जब इन परिवारों ने धर्मशाला खाली नहीं की तो देवस्थान विभाग ने इनसे किराया लेना शुरू कर दिया।

धर्मशाला में पार्किंग करवाने वाले राजू ने बताया कि रेलवे स्टेशन की पार्किंग बंद होने से यात्रियों को असुविधा हो रही थी। उनकी सुविधा के लिए वाहनों को खड़ा करवाना शुरू किया है। इनका न तो कोई टोकन लिया जा रहा है और न ही पार्किंग की कोई रेट तय है। वाहन स्वामी अपनी इच्छा से जो दे जाए, वही ले लेते हैं।

भरतपुर. देवस्थान विभाग की जमीन पर शुरू की निजी पार्किंग।

इसी का फायदा उठा रहे हैं धर्मशाला के किराएदार

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