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130 किमी से ज्यादा स्पीड में ही हो सकता है इतना बड़ा नुकसान

3 वर्ष पहले
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भरतपुर-धौलपुर जिले में 11 अप्रैल को आए तूफान से हुई तबाही को लेकर बिजली कंपनियों ने ने माना है कि 130 किमी प्रति घंटे की स्पीड की वजह से ही दोनों जिलों में इतना व्यापक नुकसान हुआ है। जेवीवीएनएल के चीफ इंजीनियर वीडी शर्मा का कहना है कि यह अंधड़ नहीं चक्रवात था और इसकी स्पीड 150 किलोमीटर से भी अधिक हो सकती है। क्योंकि जो टावर बनाए जाते हैं वे 150 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा को झेलने की ताकत रखते हैं। बुधवार की शाम जिले में कुल 5 टावर क्षतिग्रस्त हुए हैं।

इधर, केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र फरह के विशेषज्ञों का भी कहना है कि उस दिन तूफानी हवाओ की स्पीड 130 प्रतिघंटे ही थी। मौसम विज्ञानी डॉ. पवन सिसोदिया के मुताबिक यह अंधड़ नहीं बल्कि चक्रवात था। जब भी ऐसे चक्रवात बनते हैं तो उनकी स्पीड 180 किमी प्रतिघंटे तक रहती है।

पहले भी तूफान मचा चुका है तबाही
11 मई 2017 को आए तूफान में शहर के एक मैरिज होम की दीवार गिरने से 26 लोगों की मौत हुई थी।

19 मई 2015 को आए तूफान में 8 लोगों की मौत हुई थी।

5 दिन लगेंगे मरम्मत में
जयपुर विद्युत प्रसारण निगम के चीफ इंजीनियर वीडी शर्मा का कहना है कि रेस्टोरेशन के काम में 60 कर्मचारी लगे हुए हैं। इसमें करीब 5 दिन लगेंगे। उन्होंने जघीना गांव रेलवे लाइन के निकट 220 केवी लाइन के तीन टॉवर टूटे हैं। यह लाइन भरतपुर से धौलपुर को जाती है। इस तरह करीब 1.5 किमी लाइन और टॉवर नए सिरे से लगाए जा रहे हैं। वहीं 1 टॉवर 132 केवी लाइन का डीग क्षेत्र में टूटा है और 1 अन्य टॉवर 132 केवी का ही नगर और कुम्हेर के बीच टूटा है। इससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी है।

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