भरतपुर में है मौसम विभाग का केंद्र, फिर भी नहीं मिल पाती भविष्यवाणी
भरतपुर और धौलपुर जिलों में 11 अप्रैल को आए तूफान से नुकसान का असर कम हो सकता था, अगर इसकी पहले से भविष्यवाणी मिली होती। वजह यह कि भरतपुर के सेवर स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में मौसम विभाग का केंद्र यानी ऑब्जरवेटरी (वैधशाला) बनी हुई है। इस पर भारतीय मौसम विभाग ने काफी पैसा भी खर्च किया है। यहां के दो कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी। यहां तक कि उनका वेतन भी दिया जा रहा है। लेकिन, इसके बावजूद यहां मौसम विभाग के जयपुर केंद्र को या तो मौसम का डाटा मिलता ही नहीं है। अगर मिलता भी है तो देरी से, तब तक उसका कोई महत्व नहीं रहता। इसके अभाव में मौसम विभाग भरतपुर क्षेत्र के लिए ठीक से भविष्यवाणी भी नहीं कर पाता।
इसका खुलासा तब हुआ, जब दैनिक भास्कर ने गुरुवार को मौसम विभाग के जयपुर केंद्र से भरतपुर में आए तूफान की गति पता लगाने की कोशिश की। वहां से बताया गया कि भरतपुर में उस दिन हवा की गति का डाटा उपलब्ध नहीं है। जब इसका कारण जानने की कोशिश की गई तो पता लगा कि डीपीएस की ऑब्जरवेटरी पर लगे दो कर्मचारी डाटा देने में लगातार लापरवाही बरत रहे हैं। इस बारे में उनकी ओर से डीपीएस को पत्र भी लिखा गया है। मौसम विभाग की ओर से 11 अप्रैल को आए तूफान की स्पीड की जानकारी आगरा केंद्र से लेने की सलाह दी गई। इस पर पता चला कि उस दिन हवाओं की गति 130 किलोमीटर प्रति घंटा रही।
भास्कर ने खंगाला तो ये बोले जिम्मेदार अधिकारी
मौसम संबंधी जानकारी क्यों नहीं देते, इसकी जांच होगी: शर्मा
मौसम संबंधी जानकारी देने के लिए दो कर्मचारी लगे हुए हैं। सूचना देना उनकी जिम्मेदारी है। वे जानकारी क्यों नहीं देते इसकी जांच करूंगा। आज में आगरा में हूं। कल सुबह 10 बजे मामले की जानकारी करने के बाद आपको जरूर जानकारी दूंगा। -जे.के. शर्मा, प्रिंसीपल डीपीएस
मौसम का डाटा जब भी पूछो,
तभी बनाते हैं कोई बहाना
डीपीएस पर तैनात इन कर्मचारियों से जब भी मौसम संबंधी डाटा लेने की कोशिश की जाती तो उनके पर हर बार कोई न कोई नया बहाना होता है। अक्सर दोनों का जवाब एक ही होता है कि मैं आज किसी काम से बाहर हूं, आप दूसरे साथी कर्मचारी से पूछ लें। शुक्रवार को भी जब पूछा गया तो दोनों कर्मचारियों विनोद कुमार शर्मा एवं संजीव सैनी का यही जबाव था। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से यहां डीपीएस में 3 फरवरी को लगाई गई अंशकालीन मौसम वैधशाला में आर्द्रतामापी यंत्र, वायु दाब मापी यंत्र, वायु दिशा सूचक यंत्र, वर्षा मापी यंत्र एवं ताप मापी यंत्रों लगाए गए थे। इन यंत्रों के माध्यम से रोजाना सुबह 8.30 बजे और शाम 5.30 बजे आंकड़े दर्ज किए जाने एवं जनहित में सूचनाएं प्रसारित करने का प्रावधान रखा था।
पार्ट टाइम कर्मचारी लगे हैं, हम पूछताछ करेंगे, क्यों नहीं दे रहे डाटा: जैन
विभाग की अंशकालीन मौसम वैधशाला सेवर स्थित डीपीएस में है। वहां दो कर्मचारियों को ऑब्जरवेशन के लिए पार्ट टाइम नियुक्त कर रखा है। उनको विभाग की ओर से निर्धारित वेतन भी दिया जाता है। मैं कल पूछताछ करूंगा, आखिर वे जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा पा रहे हैं। और जवाब देने के लिए उन्हें पाबंद किया जाएगा। -राकेश जैन, वैज्ञानिक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग