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अब सरकारी खर्च पर लगेंगी शहीदों की प्रतिमाएं

3 वर्ष पहले
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ऐसे शहीद सैनिक जिनकी प्रतिमाएं उनके परिवार वाले नहीं लगवा पाएं हैं उनकी मूर्तियां पूर्व सैनिक बोर्ड द्वारा सरकारी खर्च पर बनवाई जाएंगी। प्रतिमा स्थल के लिए जमीन का आवंटन भी सरकार से कराया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिले में 1962 के युद्ध से लेकर अब तक 72 सैनिक शहादत दे चुके हैं, जिनमें से 28 सैनिकों की प्रतिमाएं नहीं हैं। पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड इन सभी सैनिकों की प्रतिमाएं लगवाएगा। इसकी घोषणा एवं जगह का चयन आदि का कार्य वीरांगना सम्मान यात्रा के दौरान होगा। यात्रा पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड द्वारा अगले 15 दिन में निकाली जाएगी। इसका रूट चार्ट तैयार हो गया है और तारीख सुनिश्चित करने के लिए बोर्ड के पास भेजा गया है। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड अधिकारी कर्नल सुनीलदत्त ने बताया कि वीरांगना सम्मान यात्रा 6 दिन की होगी, जिसके तहत बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजोर सभी वीरांगनाओं के घर जाएंगे। जहां वीरांगनाओं और शहीद सैनिक के माता-पिता का सम्मान किया जाएगा। साथ ही शहीद सैनिक की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि कार्यक्रम होगा। इस मौके पर शहीद सैनिक के आश्रितों की समस्याओं का संकलन किया जाएगा। बोर्ड स्तर की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया जाएगा। मुख्यालय संबंधी समस्याओं एवं सहायता पैकेज आदि के प्रस्ताव बना कर भेजे जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय स्तर की समस्याओं का निस्तारण प्रशासन से कराया जाएगा।

अच्छी पहल

जिला सैनिक कल्याण बोर्ड निकालेगा जिले भर में वीरांगना सम्मान यात्रा, घर जाकर करेंगे शहीदों के माता-पिता का सम्मान

कारगिल से पहले के शहीदों की प्रतिमाएं नहीं लगीं

जिले में आजादी के बाद हुए विभिन्न युद्धों एवं ऑपरेशन में 72 सैनिकों ने शहादत दी है, जिनमें 28 शहीद सैनिकों की प्रतिमाएं नहीं हैं। ये अधिकांश सैनिक आपरेशन कारगिल से पहले के है। क्योंकि कारगिल आपरेशन के बाद भी सरकार शहीद सैनिकों के आश्रितों को भारी-भरकम सहायता पैकेज देने लगी। साथ ही प्रतिमाएं लगवाने चलन भी कारगिल युद्ध के बाद ही प्रारंभ हुआ। सबसे अधिक शहीद कारगिल युद्ध में हुए हैं। कारगिल युद्ध में जिले के 41 सैनिक शहीद हुए थे। बोर्ड द्वारा प्रतिमाओं के लिए फंड सांसद एवं विधायक निधि से जुटाया जाएगा। जमीन प्रशासन से अलाट कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि सबसे पहले शहादत का गौरव बयाना के गांव मदनपुर निवासी शिवचरण को है। हवलदार शिवचरण 1962 में भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए थे। उन्होंने 21 अक्टूबर 1962 को शहादत दी थी।

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