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स्वच्छता एप को लेकर जागरुकता नहीं इसलिए रैकिंग में पिछड़ रहा है भरतपुर

3 वर्ष पहले
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स्वच्छता सर्वेक्षण की पहली सूची में भरतपुर का नाम नहीं होने से नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर तो सवाल खड़े हो ही रहे हैं। लेकिन सफाई को लेकर शहर के लोगों की उदासीनता भी इसका एक बड़ा कारण माना जा रहा है। सफाई संबंधी हर शिकायत का निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा लांच किए गए स्वच्छता एप को शहर में अभी तक केवल 5213 लोगों ने ही डाउन लोड किया है, जबकि जनगणना 2011 के अनुसार भरतपुर शहर की आबादी 2 लाख 52 हजार 340 है। यानी केवल दो फीसदी लोगों ने ही स्वच्छता एप डाउनलोड किया है। इसमें भी केवल 1959 लोग ही एक्टिव हैं। यानी स्वच्छता संबंधी शिकायतों को एप पर लोड कर रहे हैं।

स्वच्छता एप पर शुक्रवार तक की स्थिति के अनुसार अब तक 5393 शिकायतें दर्ज हुईं, जिसमें से 3135 का निस्तारण हुआ जबकि 278 रिजेक्ट कर दी गई हैं। बाकी पर काम चलना बताया है। रोचक यह है कि समस्या निवारण के बाद शिकायतकर्ताओं से फीडबैक भी लिया जाता है। इसमें केवल 1160 लोगों ने ही संतुष्टि जताई है। जब ये हाल है तो भरतपुर स्मार्ट सिटी की दौड़ में आगे कैसे आएगा। इसके लिए शहर के स्वयंसेवी संगठनों, छात्र संगठनों और शहरवासियों को आगे आने की जरूरत है।

अभी से मोबाइल एप पर दर्ज करें अपनी शिकायत

अगर, आपको अपने आसपास या कहीं भी गंदगी दिखे तो उसका फोटो खींचकर तुरंत स्वच्छता एप के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत करें। क्योंकि इसकी मॉनीटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर होती है। इसमें आप, कचरा उठाने वाला वाहन नहीं आने, सार्वजनिक शौचालयों में पानी की आपूर्ति नहीं होने, मृत जानवर, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई नहीं होने, झाडू नहीं लगने, कचरे के डिब्बे या कंटेनर साफ नहीं होने, सार्वजनिक स्थान पर पड़े कचरे के ढेर, सार्वजनिक शौचालयों में बिजली नहीं होने एवं सार्वजनिक शौचालयों के ब्लॉकेज आदि की शिकायत की जा सकती है।

ऐसे करे एप डाउनलोड

स्वच्छता एप को डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर में जाएं। वहां swachhata mohua एप का चयन करें। इसके बाद एप को इंस्टाल कीजिए। एप को ओपन करके अपनी भाषा चुनें। अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और नेक्स्ट बटन दबाएं। लोकेशन पर जाकर भरतपुर राजस्थान का चयन करें और done दबाएं।

मेयर और आयुक्त हैं सीधे तौर पर जिम्मेदार : बंसल

सफाई पर हर माह डेढ़ करोड़ खर्च हो रहे हैं। पहले 51 स्वच्छ शहरों में हम नहीं थे। इसका मतलब पैसे का ठीक से उपयोग नहीं हो रहा है। मेयर और आयुक्त सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। -विजय बंसल, विधायक

ढाई लाख आबादी, सिर्फ 5213 ने ही डाउनलोड किया स्वच्छता एप

सफाई कर्मियों के 326 पदों पर भर्ती इसी माह

मेयर शिवसिंह भोंट ने बताया कि सफाई कर्मियों के 326 पदों पर भर्ती इसी माह कर ली जाएगी। आवेदन पत्रों की वर्ग वार छंटनी की जा रही है। इसके बाद लाटरी के जरिए सफाई कर्मियों की भर्ती की जाएगी। इसमें पूरी तरह पारदर्शिता बरतने की कोशिश की जा रही है।

लोगों में जागरूकता की कमी है ः महापौर

स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रयासरत हैं। गत साल 3 बार सफाई अभियान चलाया था। स्वच्छता एप का उपयोग करें तो और मानीटरिंग हो सकती है।

-शिवसिंह भोंट, महापौर

स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जागरूकता जरुरी : अनिल

सफाई को लेकर जागरूकता आई है, किंतु बहुत थोड़ी है। निगम के भरोसे नहीं रहा जा सकता। संगठनों को मिलकर स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रयास करने होंगे। -अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष व्यापार संघ

एप पर 5393 शिकायतें दर्ज जबकि 3135 का ही निस्तारण

इंदौर नंबर वन हो सकता है तो भरतपुर क्यों नहीं

स्मार्ट सिटी की दौड़ में जब इंदौर प्रथम आ सकता है तो हम क्यों नहीं आ सकता। भास्कर ने पता लगाया कि इंदौर स्वच्छता में नंबर वन कैसे आया। पता चला कि वहां के लोगों ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई थी। हमें भी कुछ कदम उठाने होंगे। जैसे:-

घर-घर से कचरा कलेक्शन नियमित रूप से हो और उसका सही निस्तारण हो।

व्यापार संघ सभी दुकानों पर डस्टबिन रखवाने की पहल करे।

रेहड़ी, ठेले वालों को भी पाबंद किया जाए कि वे डस्टबिन रखें। ऐसा नहीं करने पर चालान हों।

होटल, मैरिज होम, और बड़े संस्थान अपना निजी कचरा निस्तारण प्लांट लगाएं।

चार पहिया वाहनों में भी छोटे-छोटे डस्टबिन रखवाए जा सकते है।

स्वच्छता के प्रति शहर के लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चले।

शहर के लोग ज्यादा से ज्यादा स्वच्छता एप डाउनलोड कर शिकायत करने की आदत डालें।

शहर में रात्रि के समय सफाई की विशेष व्यवस्था हो।

गंदगी फैलाने वालों का चालान करने के साथ ही उन पर सख्त कार्रवाई हो।

शहर में प्लास्टिक की थैलियां पूरी तरह से बंद करनी चाहिए।

अधिक से अधिक पौधारोपण करके वातावरण को स्वच्छ बनाया जाना चाहिए।

स्वच्छता एप पर आने वाली शिकायतों का समय पर निस्तारण हो।

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