नगर निकायों में सफाई कर्मियों की हो रही भर्ती प्रक्रिया में वाल्मीकि समाज के अलावा अन्य जातियों के बेरोजगारों द्वारा भाग लेने के खिलाफ समाज लामबंद हुआ। वक्ताओं ने 26 मई से सफाई कार्य बंद रखने का ऐलान किया है। किला स्थित वाल्मीकि भवन में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अखिल राजस्थान सफाई मजदूर कांग्रेस के पद अधिकारियों ने बताया कि 26 मई से लेकर 4 जून तक सफाई कार्य बंद रहेगा इसके बाद 5 जून को हड़ताल की संभावना बन सकती है। बैठक में विजय चौहान, मुकेश चौहान, सुभाष चौहान, मिश्री लाल जादौन, अशोक पठानिया, राजेश चौहान, अनिल लोहारा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे। इधर, जनता आंदोलन समिति के संयोजक राघवेंद्र सिंह ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर वाल्मीकि समाज के लोगों को ही सफाई कर्मचारियों के पद पर नियुक्ति देने की मांग की है। संभागीय आयुक्त को दिए ज्ञापन में लिखा है कि निगम में सफाई कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया मनमाने तरीके से की जा रही है, इससे समाज में रोष बढ़ रहा है। पूर्व में सफाई कर्मियों की भर्ती में 47 व्यक्ति नियुक्त कर लिए गए थे, वो वाल्मीकि समाज के न होकर अन्य जातियों के थे। उन 47 कर्मचारियों ने 1 दिन भी पिछले दस वर्षों से सफाई कार्य नहीं किया है।
भास्कर संवाददाता | भरतपुर
नगर निकायों में सफाई कर्मियों की हो रही भर्ती प्रक्रिया में वाल्मीकि समाज के अलावा अन्य जातियों के बेरोजगारों द्वारा भाग लेने के खिलाफ समाज लामबंद हुआ। वक्ताओं ने 26 मई से सफाई कार्य बंद रखने का ऐलान किया है। किला स्थित वाल्मीकि भवन में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अखिल राजस्थान सफाई मजदूर कांग्रेस के पद अधिकारियों ने बताया कि 26 मई से लेकर 4 जून तक सफाई कार्य बंद रहेगा इसके बाद 5 जून को हड़ताल की संभावना बन सकती है। बैठक में विजय चौहान, मुकेश चौहान, सुभाष चौहान, मिश्री लाल जादौन, अशोक पठानिया, राजेश चौहान, अनिल लोहारा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे। इधर, जनता आंदोलन समिति के संयोजक राघवेंद्र सिंह ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर वाल्मीकि समाज के लोगों को ही सफाई कर्मचारियों के पद पर नियुक्ति देने की मांग की है। संभागीय आयुक्त को दिए ज्ञापन में लिखा है कि निगम में सफाई कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया मनमाने तरीके से की जा रही है, इससे समाज में रोष बढ़ रहा है। पूर्व में सफाई कर्मियों की भर्ती में 47 व्यक्ति नियुक्त कर लिए गए थे, वो वाल्मीकि समाज के न होकर अन्य जातियों के थे। उन 47 कर्मचारियों ने 1 दिन भी पिछले दस वर्षों से सफाई कार्य नहीं किया है।