शहर में पिछले 20 दिन से वोल्टेज कम-ज्यादा आने की शिकायतें बनी हुई है। इससे आधे से ज्यादा शहर यानी 57 में से लगभग 30 हजार उपभोक्ता परेशान हैं। वोल्टेज की समस्या की वजह से आए दिन पंखा, कूलर, टेलीविजन समेत कई तरह के उपकरण फुंक रहे हैं या खराब हो रहे हैं। जिले में 2 मई को आए तूफान के बाद से यह समस्या ज्यादा बढ़ी है। क्योंकि तब शहर में करीब 450-500 खंभे क्षतिग्रस्त हुए थे। इससे बिजली तंत्र अस्त-व्यस्त हो गया था। लोगों का गुस्सा और राजनीतिक दबाव कम करने के लिए बीईएसएल कंपनी ने जुगाड़ करके जैसे-तैसे बिजली तो चालू कर दी, क्योंकि कुछ कॉलोनियों के कनेक्शन आपात स्थिति में दूसरे फीडरों से जोड़ने पड़े। लेकिन इससे कुछ फीडरों पर लोड ज्यादा बढ़ गया। शहर में करीब 50-60 बिजली खंभे अभी भी टूटे पड़े हैं।
इसकी दूसरी वजह यह भी है कि शहर में पिछले डेढ़ साल के दौरान करीब 6500 नए उपभोक्ता बढ़े हैं। लेकिन बीईएसएल कंपनी ने उपभोक्ता बढ़ने के हिसाब से विद्युत तंत्र का विस्तार नहीं किया। नए फीडर बनाने के बजाय पुराने फीडरों की ही लंबाई बढ़ा दी गई है। बीईएसएल के एसीओ जयंत राय ने बताया कि तूफान से बिजली तंत्र को गंभीर क्षति हुई थी। फीडरों पर लोड अस्त-व्यस्त होने से फ्लक्चुएशन बढ़ा है। अभियान शुरू कर दिया है, समाधान करने में कम से कम एक महीने का समय लगेगा।
20 हजार शिकायतें पिछले 15 दिनों में वोल्टेज संबंधी सामने आईं।
एक पखवाड़े में ही 20,000 से ज्यादा शिकायतें
अब तक शहर में लाखों रुपए के उपकरण खराब हो चुके हैं। उपभोक्ताओं की ओर से इस संबंध में बीईएसएल के अधिकारियों को लगातार शिकायतें की जा रही हैं। लेकिन, अधिकांश उपभोक्ताओं की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। पिछले एक पखवाड़े में यानी 4 से 21 मई के बीच ही 20,000 से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें सर्वाधिक शिकायतें वोल्टेज कम-ज्यादा आने के कारण बिजली उपकरण फुंकने की हैं। बिजली कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि लगभग सभी शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।
एक्सपर्ट व्यू
10 फीसदी से ज्यादा उतार-चढ़ाव उपकरण होते हैं खराब
इस संबंध में डिस्कॉम के एसई दीपक गुप्ता का कहना है कि वोल्टेज फ्लक्चुएशन (कम-ज्यादा) कई कारणों से होता है। जैसे कि न्यूटल का प्रॉपर नहीं होना, लाइन का ओवर लोड होना, फीडर की लंबाई बढ़ने से लाइन में प्रॉपर वॉल्टेज नहीं आना और ट्रांसफार्मर पर क्षमता से अधिक कनेक्शनों का होना आदि। बल्ब आदि की रोशनी वोल्टेज पर निर्भर करती है। वोल्टेज कम या ज्यादा होने से जहां आंखों पर विपरीत असर पड़ता है। वहीं बिजली उपकरणों के खराब होने का अंदेशा बढ़ जाता है। क्योंकि देश में उपयोग किए जाने वाले विद्युत उपकरण 50 हर्टज आवृत्ति और 240 वोल्टेज के लिए बने होते हैं। यदि वोल्टेज में 10 प्रतिशत से अधिक उतार चढ़ाव होता है तो उपकरण खराब भी हो जाते हैं।
केस
जवाहर नगर निवासी राहुल शांडिल्य ने बताया तूफान के बाद से उनकी कालोनी में वॉल्टेज उतार-चढ़ाव हर पल होता ही रहता है। घर में पंखा और एलईडी फुंक चुकी है। बीईएसएल में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन समस्या समाधान नहीं हुआ है।
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57 हजार कुल विद्युत कनेक्शन
केस
सुभाष नगर निवासी वर्षा ने बताया कि वोल्टेज फ्लक्चुएशन ने परेशान कर रखा है। वोल्टेज कम हो जाने से पंखा-कूलर तक प्रॉपर हवा नहीं फेंकते। पिछले सप्ताह में घर में लगी तीन एलईडी लाइट खराब हो चुकी है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
30 हजार उपभोक्ता शहर में हैं प्रभावित
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6.5 हजार नए उपभोक्ता डेढ़ साल में बढ़े।
भास्कर नॉलेज
उपकरण फुंकने का भी लिया जा सकता है हर्जाना
वोल्टेज कम-ज्यादा होने की वजह से अगर आपके घर में पंखा, एसी, टेलीविजन, मिक्सी अथवा कोई भी उपकरण फुंक जाता है अथवा खराब होता है तो उसके लिए बिजली कंपनी से नियमानुसार हर्जाना वसूला जा सकता है। लेकिन, हर्जाना मिलना तभी संभव है जब उपभोक्ता यह साबित करे कि संबंधित उपकरण वोल्टेज कम या ज्यादा आने की वजह से ही खराब हुआ है। मैकेनिक अथवा कंपनी के सर्विस सेंटर से प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा सकता है। वोल्टेज कम या ज्यादा आने की वजह से बिजली उपकरण फुंकने की शिकायत बिजली कंपनी में जरूर दर्ज कराएं। उपकरण फुंकने का कंपनी पर क्लेम भी करें।
केस
मोरी चार बाग निवासी नेहा चौहान ने बताया कि उनके क्षेत्र में वोल्टेज कभी कम हो जाते हैं कि कोई भी बिजली उपकरण प्रॉपर काम नहीं करता और वोल्टेज ज्यादा होते हैं तो डर लगता है कि कहीं उपकरण खराब न हो जाएं। बीईएसएल में कई बार शिकायत कर चुकी हूं, कोई सुनता ही नहीं है।
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