भरतपुर | अब मकान किराये से होने वाली आय को छिपाना आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। क्योंकि मकान, जमीन और दुकान किराए से होने वाली कमाई भी आयकर विभाग की निगाह में है। पिछले दिनों आयकर विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में सामने आया है कि किराये के रूप में मोटी कमाई करने और आयकर विभाग को जानकारी नहीं दे रहे हैं। उसके बाद विभाग ने 2018-19 के आयकर रिटर्न फार्म में इस बार व्यक्तिगत करदाताओं से मकान, दुकान और जमीन से कमाई का पूरा हिसाब देने को कहा है। आयकर रिटर्न में उन्हें किराये के रूप में मकान से कमाई और उस पर स्थानीय निकाय को दिए गए टैक्स की जानकारी भी देनी होगी। पहले किराए से होने वाली आय के बारे में आयकर रिटर्न फॅार्म आईटीआर-2 में हिसाब लिया जाता था, लेकिन इस बार इसे आईटीआर-1 में भी यह जानकारी देनी पड़ेगी। अगर किसी करदाता ने अपना मकान किराए पर उठाया है तो उसे आयकर रिटर्न में किराए से आमदनी के बारे में जानकारी तो देनी ही होगी। इसके साथ उन्हें मकान खरीदने या बनाने के लिए आमदनी व स्त्रोत का का ब्यौरा भी रिटर्न में देना होगा। इस बार “सहज” फार्म में एक नया बिंदु और जोड़ा है। सीए अतुल मित्तल ने बताया कि इनकम टैक्स रिटर्न में पहले भी किराए से होने वाली आय की जानकारी का कॉलम था।