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रियासतकालीन दरवाजों पर लिखी जाएगी इतिहास गाथा

3 वर्ष पहले
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पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से शहर के सभी ऐतिहासिक दरवाजों पर राइटअप लगाए जाएंगे। इसमें दरवाजे तथा उस इलाके का इतिहास और दरवाजे से जुड़ी गौरव गाथा लिखी जाएगी।

इसके लिए विशेष प्रकार का स्टोन स्टैंड लगाया जाएगा, जिसमें पत्थर पर खुदाई कर राइटअप लिखा जाएगा। राइटअप का मैटर पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने आमेर विकास प्राधिकरण को दे दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनो सरकार ने शहर के दो पोल सहित 10 ऐतिहासिक दरवाजों के संरक्षण एवं मरम्मत के लिए एक करोड़ रुपए जारी किए थे। नोडल एजेंसी आमेर विकास प्राधिकरण ने सभी दरवाजों की मरम्मत, रंग रोगन एवं लकड़ी के गेटों को दुरुस्त करा दिया है, किंतु अभी राइटअप लिखा जाना बाकी है। संग्रहालय अधीक्षक सोहन सिंह चौधरी ने कहा कि हमने राइटअप आमेर विकास प्राधिकरण को उपलब्ध करा दिए हैं। अगले महीने तक राइटअप लगवाने की बाद प्राधिकरण के अधिकारियों ने कही हैं। इसके अलावा गेटों के आसपास से बिजली के खंभों एवं तारों को हटवाने के लिए बिजली विभाग की मांग के अनुसार राशि भी जमा करा दी है, किंतु अभी तक तार व खंभे नहीं हटाए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से शहर के मथुरा गेट, कुम्हेर गेट, अनाह गेट, नीमदा गेट, केतन गेट, गोवर्धन गेट, बी नारायण गेट, अटल बंध गेट तथा सूरजपोल व चांदपोल के संरक्षण एवं मरम्मत का कार्य हुआ है। जबकि दिल्ली गेट केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन है तथा प्राचीन जघीना गेट का अस्तित्व मिट गया है। नगर निगम ने प्रतिकृति स्वरूप जघीना गेट बनाया है, किंतु पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की संरक्षित स्मारक की श्रेणी में यह शामिल नहीं है। इसलिए प्राधिकरण ने दिल्ली व जघीना गेट को छोड़ सभी में काम किया है।

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