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न कावां में मिलेगा न काशी में मिलेगा.....

3 वर्ष पहले
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साहित्य दर्पण संस्था की ओर से से कार्यालय गोपालगढ़ में अतर सिंह शर्मा की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन व डॉ.. लोकेश शर्मा की पुस्तक सफर जिन्दगी का गजलों के दूसरे भाग का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पूर्व चेयरमैन डॉ. सुभाष गर्ग थे। विशिष्ट अतिथि डोरी लाल शर्मा, घनश्याम सोलंकी, गिर्राज प्रसाद शर्मा बछामदी थे।

काव्य गोष्ठी में डॉ. कुसुम शर्मा ने ना कावां में मिलेगा न काशी में मिलेगा नैसर्गिक आनंद तो सिर्फ मां की गोद में ही मिलेगा..., कवि डॉ. लोकेश शर्मा ने आदमी को आदमी बनाने के लिए जिंदगी में प्यार की कहानी चाहिए..., श्याम सिंह जघीना ने हे सियासत की साडी जमी देख ले..., हृदयेश पाटीदार ने लुटेरा आबरू का शूली पर अगर चढ़ता है..., कवि भगवान सिंह भ्रमर ने एक है या धरा और गगन एक है..., सोमदत्त व्यास ने न दहेज देंगे न दहेज लेंगे..., जयपाल तरूण ने वक्त मिल जाए तो पढ़ लेना इन कागज के टुकड़ों को..., चन्द्रभान फौजदार ने इस देश के उत्थान की तस्वीर बेटियां..., डॉ. सुरेश चतुर्वेदी ने सावधान रहना सीमा पर कहता पहरेदारों से..., रेणुदीप गौड़ ने जीवन शैली उलझन के कोई परिभाषा क्या देना..., बाबा छीतर सिंह ने जिसने सारा ब्रह्मांड रचाया, क्यों बैठेगा मंदिर में..., नेकराम नेक ने देश की अनुपम धरोहर हैं बेटियां..., मनमोहन अभिलाषी ने बंदिश जो साहित्य जगत में उनको हम सब तोड़ें..., ओमप्रकाश तिवारी ने पहचान लेती हैं नजरों को नजर से..., सुघड़ सिंह सुग्गा ने मौत आनी है जरूर फिर काहे का गरूर..., अभिषेक योगी ने भारत में सिंहासन चुप्पी साधने लगा कविता पढ़ी। इस अवसर पर कवि कृष्ण मुरारी नागेश, राम बाबू शुक्ल, रवि नागर, निहारिका, सुनील कुमार गुडडू आदि कवियों ने कविताएं पढ़ी। इस अवसर पर जसवंत दारापुरिया, डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. ईशा शर्मा, गंगाराम पाराशर, धीरेंद्र गोधारा, सतीश सोगरवाल, चेतन शर्मा, यादराम कर्दम आदि मौजूद थे। संचालन श्याम सिंह जघीना ने किया।

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