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जाट महासभा ने 19 दिन में 11 मृत्युभोज रुकवाए, 37 गांवों में नहीं करने का लिया संकल्प

3 वर्ष पहले
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मृत्युभोज को समाप्त कराने के लिए जिला जाट महासभा ने एक बड़ा कदम उठाया है। सामाजिक पहल की है, जो रंग लाने लगी है। इसमें सर्व समाज जुड़ता जा रहा है। महज 19 दिन में 11 मृत्युभोज रुके हैं। साथ ही 37 गांवों के लोग मृत्युभोज नहीं करने का संकल्प ले चुके हैं। महासभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेमसिंह कुंतल ने बताया कि इसका आइडिया गांव भोगना से आया। यहां रम्मो की मां की मौत पर गांव वालों का पाल के लिए ब्रह्मभोज करने का दबाव था। किंतु रम्मो का कहना था कि तीन माह पहले ही दो बेटियों की शादी की है। कर्ज में हूं। ब्रह्मभोज के लिए 5-7 लाख रुपए खर्च नहीं कर सकते। दो बीघा खेत बिक जाएगा। इससे नाराज कुछ लोगों ने उसके दुख में शामिल होने किनारा कर लिया। जाट महासभा के पदाधिकारी लगातार 5 दिन तक गांव में गए। समझाइश की। तभी लगा कि यह तो समाज में बहुत खतरनाक स्थिति है। इसलिए जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया। इसकी शुरुआत 2 मई को सबसे बड़े गांव जघीना से की गई। इस गांव में एक ही दिन में 3 जनों की मौत हुई। महासभा के प्रयासों से तीनों परिवारों ने मृत्युभोज नहीं करने का संकल्प लिया। इस पहल से जुडे़ इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा ने कहा कि मृत्युभोज को गलत तो सभी मानते हैं, किंतु परंपरा के कारण बदलाव का कदम उठाने से झिझकते हैं। महासभा के प्रयासों से लोग इस सामाजिक बुराई के प्रति मुखर हो रहे हैं। गांव जघीना,ं भवनपुरा, तमरोली, सोगर, उवार, तुहिया, टोंटपुर, नगला जीवना, त्योंगा, संता नगला, नगला हथैनी, जाटौली रथभान, में सर्व समाज के लोगों ने मृत्यु भोज नहीं करने का संकल्प लिया है।

जिले के सबसे बड़े गांव जघीना से की शुरूआत

सर्व समाज के लोग जुटे आगे बढ़ाने में

अभियान की भले की जाट समाज ने की हो पर अब जहां पर भी पंचायत होती है गांव के सभी समाजों के लोग जुट जाते हैं। साथ ही सभी की ओर से एक जुट होकर संकल्प लिया जाता है कि गांव में कोई मृत्युभोज का आयोजन नहीं करेगा। साथ ही यह भी आह्वान किया जाता है कि काई आयोजन करेगा भी तो गांव व समाज के लोग इसमें शामिल नहीं होंगे। साथ ही इस संदेश को अन्य गांवों तक पहुंचा रहे हैं।

बदलाव का फार्मूला: जो समाज ज्यादा उसी से कराई पहल

जाट महासभा ने इस अभियान में बहु संख्यक समाज को आगे किया है। जिस गांव में जिस जाति के लाेग अधिक रहते हैं उन्हीं के पंच-पटेलों और मुखियाओं को आगे किया। उन्हीं से मृत्युभोज नहीं करने का संकल्प दिलाया। जघीना में हुई पहली पंचायत पूरे तीन दिन तक चली, अंत में सर्व समाज की सहमति से मृत्युभोज बंद हुआ।

पीपला गांव में सभी समाज का सामूहिक निर्णय

रारह। गांव पीपला में जिला जाट महासभा की बैठक में सर्वसमाज ने मृत्युभोज बंद करने का फैसला लिया। बैठक की अध्यक्षता ठाकुर राधेश्याम ने की । प्रतिनिधि राजाराम, गोपाल सिंह हथैनी आदि ने कहा कि मृत्युभोज परिवार व समाज को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है। प्रदेश महामंत्री राकेश फौजदार ने कहा कि सर्वसमाज द्वारा गांव गांव मृत्युभोज बंद करने पर पंचायत आयोजित कर लिए जा रहे फैसले से ना केवल मृत्युभोज समाप्त होगा अन्य सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस मौके पर हरभान सिंह,गोपाल सिंह हथैनी,बलबीर सिनसिनी,राजू जाटौली आदि मौजूद थे।

नाॅलेज...सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनै:

श्रीमद् भगवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि सम्प्रीति भोज्यानि आपदा भोज्यानि वा पुनै: अर्थात जब खिलाने वाले के मन में पीड़ा और वेदना हो तो ऐसी स्थिति में कदापि भोजन नहीं करना चाहिए। क्योंकि शोक में करवाए गए भोज को करने से ऊर्जा का नाश होता है।

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