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जिले में करोड़ों खर्च कर लगाए 531 आरओ प्लांट में से 211 हो गए बंद

3 वर्ष पहले
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आमजन को मीठा पानी पिलाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर लगाए गए आरओ प्लांट नियमित देखरेख व सारसंभाल के अभाव में बंद हाेते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि पीएचईडी ने 531 आरओ प्लांट लगाए थे, जिनमें से 211 बंद हो गए। नतीजन, ग्रामीणों को आज भी शुद्ध व गुणवत्तायुक्त पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। हालांकि शहर सहित कई इलाकों में तो चंबल के पानी की सप्लाई होने से लोगों को राहत है। मगर गांवों में हालात बदतर हैं। पीएचईडी की ओर से इन आरओ प्लांटों का नियमित संचालन करने के लिए निजी कंपनियों को ठेका दे रखा है। लेकिन कंपनियों की ओर से बंद प्लांटों को दुरुस्त करना तो दूर इनकी ओर नजर तक इनायत नहीं की जा रही है। एेसे में आरओ प्लांट नाकारा बन कर रह गए हैं। उल्लेखनीय है कि जिले के अधिकांश गांवों में खारे पानी की समस्या है। लोग इसी पानी को पीकर हलक तर कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मीठा पानी नहीं मिल रहा है। आमजन को आरओ प्लांट लगने पर काफी संबल मिला था, मगर अब स्थिति पहले जैसी बनकर रह गई है।

बाबूला. बाबेन मे पानी के लिए कुएं पर जुटीं महिलाएं।

थ्री फेस बिजली नहीं आने से कुएं पर लग रही है महिलाओं की भीड़

बाबूला। क्षेत्र में 2 मई को आए तूफान से चरमराई बिजली व्यवस्था के 13 दिन बाद कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। 13 दिन बाद भी कुछ गांव में अभी भी विद्युत सप्लाई बंद है। क्षेत्र में आरओ प्लांट पर थ्री फेस बिजली नहीं पहुंचने से आरओ प्लांट शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में महिला कुओं का सहारा ले रही हैं। पानी की अधिक सिंचाई होने के कारण कुछ समय बाद कुआं से कीचड़ युक्त पानी महिलाएं भरकर ले जाने को मजबूर हो रही है। कुआं पर अधिक भीड़ लगने से महिलाओं को कतार लगाकर इंतजार करना पड़ता है। पंचायत समिति सदस्य रीना मीणा और आरओ संचालक परमवीर सिंह ने बताया गांव बावन में थ्री फेस लाइट नहीं आने से आरओ प्लांट 13 दिन से बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में निजी आरओ प्लांट मालिक दोगुनी रेट पर पानी बेच रहे हैं। कुम्हेर में निजी करीब 5 आरओ प्लांट हैं ऐसे में निजी आरओ प्लांट वालों की बल्ले-बल्ले हो रही है।

भरतपुर. अजान बांध के पास बंद पड़ा सेवर ब्लॉक का आरओ प्लांट ।

4 ब्लॉकों में 45 से 70 फीसदी आरओ प्लांट बंद

जिले के 10 ब्लाॅकों में से 4 के आरओ प्लांट 45 से 70 फीसदी तक बंद हैं। हालात ये हैं कि कुम्हेर में सर्वाधिक 73 में से 47, नगर में 82 में से 41, सेवर में 85 में 38 एवं डीग ब्लाॅक में 56 में से 37 आरओ प्लांट बंद हैं। हालांकि जिले के कई गांवाें में 320 आरओ प्लांट चालू हैं, लेकिन यदि कंपनियों की ओर से नियमित रखरखाव नहीं रखा गया तो वो दिन भी दूर नहीं होगा कि ये आरओ प्लांट भी जल्द बंद हो जाएंगे।

जिले में दो मई को आए तूफान में बिजली आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा जाने के कारण अधिकांश आरओ प्लांट बंद हो गए हैं। जैसे-जैसे बिजली आपूर्ति मिल रही है, उन्हेंं चालू कराया जा रहा है। लोगों को जल्द ही समस्या से निजात मिलेगी।

उत्तम सिंह, एक्सईएन पीएचईडी

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