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190 साल पुराना ड्रेनेज सिस्टम ही करेंगे ठीक, ढाई साल में होगा तैयार

3 वर्ष पहले
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भरतपुर शहर को ड्रेनेज समस्या से निजात दिलाने के लिए अब करीब 190 साल पुराने कंडम सिस्टम को ही सुधारा जाएगा। सिटी फ्लड कंट्रोल ड्रेन (सीएफसीडी) के जीर्णोद्धार पर करीब 42 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें नगर निगम व यूआईटी आधा-आधा पैसा वहन करेंगे। फिलहाल यूआईटी ने 8 लाख रुपए खर्च करके नोएडा की एक कंसलटेंट फर्म से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई है। इस रिपोर्ट पर सिंचाई विभाग और जयपुर स्थित एमएनआईटी से राय ली जा रही है। इनकी हरी झंडी मिलने के बाद इसके लिए टेंडर किए जाएंगे। टेंडर होने के बाद इसमें करीब दो साल लगेंगे। यह काम अगले ढाई साल में पूरा होने की संभावना है। यूआईटी सचिव लक्ष्मीकांत बालोत ने बताया कि सीएफसीडी की डीपीआर को हाल ही हुई यूआईटी की ट्रस्ट मीटिंग में मंजूरी मिल गई है। इस डीपीआर का टेक्निकल एक्सपर्ट से परीक्षण कराया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट इसी महीने मिलने की संभावना है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

42 करोड़ आएगा खर्चा, निगम व यूआईटी देंगे आधा-आधा
यूआईटी ने नोएडा की कंसलटेंट फर्म से 8 लाख रुपए में तैयार कराई डीपीआर
बदहाल अवस्था में शहर का सीएफसीडी ड्रेनेज सिस्टम।

कच्ची खाई में अतिक्रमण होने से ड्रेनेज की समस्या
रियासतकाल में सर्कुलर रोड के सहारे कच्ची खाई बनाई गई थी। तब से अब तक यही नहर शहर के लिए ड्रेनेज का काम कर रही थी। इसमें अतिक्रमण होते चले गए। सिस्टम के फेल होने के बाद गंदे नाले किले के चारों ओर बनी सुजान गंगा नहर में भी गिर रहे हैं। ड्रेन में जमा नहीं होगी सिल्ट (मिट्टी): यूआईटी के मुताबिक सीएफसीडी की डिजाइन इस तरह से तैयार कराई गई है जिससे इसमें सिल्ट (मिट्टी) जमा नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि इसे यू और जिगजेग स्टाइल में बनाया गया है। इस ड्रेन के चार हिस्से होंगे। सिल्ट सबसे निचले हिस्से में ही पहुंचेगी। वहां भी पानी का बहाव मिट्टी को जमने नहीं देगा। यह नहर पूरी तरह पक्की होगी।

अगले महीने होंगेे टेंडर

सीएफसीडी की 42 करोड़ की डीपीआर तैयार है। थर्ड पार्टी अप्रेजल को भेजी है। उन्होंने रिपोर्ट देने को कहा है। संभावना है कि अगले माह टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दें। इस पर निगम से सहमति बन गई है। -लक्ष्मीकांत बालोत, सचिव यूआईटी

निगम देगा Rs. 21 करोड़

यूआईटी ने सीएफसीडी की डीपीआर बनवाई है। इसमें होने वाले खर्च की आधी राशि निगम वहन करने को तैयार है। हम अपने हिस्से के 21 करोड़ रुपए यूआईटी को देंगे। इसके लिए लिखित सहमति भी दे दी है। -शिवसिंह भोंट, महापौर

जलभराव से मिलेगी मुक्ति
बरसात के मौसम में हर साल मथुरा गेट, नमक कटरा, नदिया मोहल्ला, गुलाल कुंड, काेली मोहल्ला, वासन गेट, अटल बंद, बुध की हाट, जामा मस्जिद, दही वाली गली आदि इलाकों में पानी भर जाता है। सीएफसीडी बनने से ड्रेनेज सिस्टम फिर से दुरुस्त हो जाएगा। इससे शहर में काफी हद तक गंदगी की समस्या खत्म हो जाएगी।

करीब 40 फुट चौड़ा होगा मुख्य नाला

सीएफसीडी का मुख्य पक्का नाला करीब 40 फुट चौड़ा होगा। इसके दोनों ओर 20-20 फुट की सीसी रोड और 10-10 फुट की हरित पट्टी बनाई जाएगी। इससे खाई पर अतिक्रमण की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।

एक्सपर्ट व्यू
ड्रेनेज सिस्टम एक्सपर्ट सिंचाई विभाग से सेवानिवृत एक्सईएन शिवरतन सिंह धनकर ने बताया कि शहर के ड्रेनेज के लिए कच्ची खाई का निर्माण कराया थाअतिक्रमणों से कच्ची नहर सिस्टम फेल हो गया। ऐसे में सीएफसीडी ही विकल्प है।

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