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देवस्थान विभाग से किरायेदारों का रिकॉर्ड गायब

3 वर्ष पहले
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देवस्थान विभाग भरतपुर से बहुत से किराएदारों का रिकॉर्ड गायब है। मांगने पर भी उन्हें किरायानामा या उसकी कॉपी नहीं दी जा रही है। सूचना का अधिकार के तहत दी गई सूचना में भी विभाग ने लिख कर दिया है कि उनके पास किरायानामा आदि का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आशंका है कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह रिकॉर्ड गायब किया गया है, ताकि विभागीय संपत्ति को हड़पा जा सके। गंभीर बात यह है कि पता होते हुए देवस्थान विभाग के अफसर इस मामले में अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि किराएदार किराया जमा कराने के लिए पिछले कई महीनों से विभाग में चक्कर काट रहे हैं। उन्हें रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के बजाय विभाग किराया राशि जमा कराने के नोटिस जारी कर रहा है।

देवस्थान विभाग की जिले में करीब 493 वाणिज्यिक संपत्तियां हैं। इनमें गंगा मंदिर की 125, लक्ष्मण मंदिर की 25 दुकान एवं गणेश चौबुर्जा की 5 एवं सापटिया मंदिर की 4 दुकानें शामिल हैं। कुछ लोगों ने ये संपत्तियां खुद उपयोग करने के बजाय आगे किराए पर दे दी हैं। दुरुपयोग के कारण कहीं ये खाली न करवा ली जाएं, इसीलिए रिकॉर्ड गायब कराए जाने की आशंका है। विभाग द्वारा इनसे लंबे समय से किराया भी नहीं वसूला जा रहा है। इधर, विभाग का कहना है कि केवल 50 से 60 दुकानों के किरायेनामे ही गायब हैं। कई बार मुख्य किराएदार अपनी दुकान किसी अन्य को बेच देता है। उसका रिकॉर्ड विभाग में अपडेट नहीं हो पाता है। ऐसे में विभाग को उनसे किराया वसूलने में भी दिक्कत आती है।

गड़बड़झाला

आरटीआई की सूचना में विभाग ने माना-रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, विभाग को राजस्व का भारी नुकसान

एक दुकान से ही 8 लाख रुपए का राजस्व नुकसान

राज्य सरकार के आदेश 6 जून, 2000 के तहत किराया निर्धारण नीति की पालना में सार्वजनिक निर्माण विभाग के स्टैंंडिग आर्डर वर्ष 1995 द्वारा देवस्थान विभाग के रजिस्टर अनुसार विभागीय किराएदार कैलाशचंद पर प्रति माह 3523 रुपए किराया निर्धारित किया गया था। यह 1 अप्रैल, 2000 से लागू किया गया। इस तरह करीब 215 महीने की किराया राशि के रूप में कैलाशचंद को 8 लाख रुपए जमा कराने थे। लेकिन, उसने यह रकम जमा ही नहीं कराई। नदिया मोहल्ला निवासी बनवारी लाल गुप्ता ने सूचना अधिकार के तहत जब इसकी जानकारी ली तो पता चला की विभाग के पास इसका किरायानामा ही नहीं है। निवर्तमान सहायक आयुक्त केके खंडेलवाल ने आरटीआई में लिखित जानकारी दी है कि कैलाश चंद का किरायानामा विभाग के पास मौजूद नहीं है।

पूर्व सहायक आयुक्त रहे के.के. खंडेलवाल को उदयपुर आयुक्त कार्यालय से मंगवाने चाहिए थे। इस तरह दुकानदारों से किराया वसूला जा सकता था। सरकार ने नई किराया नीति तैयार कर ली है। कैबिनेट में अनुमोदन के बाद नीति जून तक लागू होगी। -सुनील मत्तड़, सहायक आयुक्त देवस्थान विभाग भरतपुर

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