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डेढ़ दर्जन हैंडपंप सूखे, ट्यूबवेल की धार पतली, दो किमी दूर से लाते हैं पानी

3 वर्ष पहले
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यहां से करीब 8 किमी दूर स्थित ग्राम सिनोधा पखवाड़ेभर से पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। गांव में खुदे डेढ़ दर्जन से अधिक हैंडपंप में पानी नहीं है। सरकारी ट्यूबवेल की भी धार पतली होकर सूखने के कगार पर है।

ग्रामीणों ने बताया कि हमलोग साइकिल, बाइक व बैल गाड़ियों से डिब्बे तथा ड्रमों में भरकर डेढ़-दो किमी दूर कभी भाटापारा रोड तो कभी गोरदी से पेयजल एवं पशुओं के लिए पानी लाते हैं। ग्रामीणों ने समस्या को देखते हुए शासन से टैंकर की व्यवस्था करने की मांग की है। गांव के बाहर गांव गंगाजल योजना के तहत तालाब में आ रहे पाइप से पानी की पतली धार के पास लगी भीड़ में से दुर्गा, दुरपती ने बताया कि टयूबवेल से आ रहा पानी कभी भी बंद हो जाता है। आजाद मोहल्ले में स्कूल के पास पानी भर रही गीता और जमुना यदु ने कहा कि घंटेभर से सारा काम छोड़कर पेयजल लेने हैंडपंप चलाने पर भी अब तक दो गुंडी ही पानी भर पाए हैं। वहीं पर खड़े बच्चों ने बताया कि स्कूल की बोरिंग में भी पानी नहीं है।

सुहेला. गंगाजल योजना के तहत तालाब किनारे पाइप से आ रहे पानी को भरने लगी भीड़।

दो किमी दूर निजी बोर से तड़क भरते हैं पानी

ग्राम के रोहित वर्मा, हीराबाई यदु ने घर में शादी होने तथा कांति वर्मा ने ससुर के निधन की जानकारी देते हुए बताया कि गर्मियों में यहां पर हमेशा से पानी की गंभीर समस्या रही है, जिसे दूर करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है। विश्राम यदु, छन्नू यदु व शैलेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि गांव में पानी संकट के कारण देढ़ दो किमी दूर जरौद भाटापारा मार्ग के निजी बोर तथा गोरदी गांव में सुबह 3 बजे जाकर पेयजल लेकर आते हैं। ग्रामीणों ने शासन से गांव में पेयजल के लिए टैंकर की व्यवस्था करने की मांग की है।

बोर खोदा, पाइप बिछाई, किसान ने नहीं दिया पानी: सरपंच झालाराम वर्मा ने बताया कि पेयजल व निस्तारी की बेहद गंभीर स्थिति को देखते हुए दो साल पहले गोरदी के सुरेश नामक एक किसान के खेत में बोर खनन किया गया था। इसके बाद गांव तक पाइपलाइन बिछाई गई थी, लेकिन बाद में किसान ने पानी देने से इंकार कर दिया। जलस्तर नीचे गिरने के कारण हैंडपंपों में और पाइप डालने के लिए दो दर्जन पाइप मंगाए गए हैं, जिसे डाला जाएगा।

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