कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व मधुमक्खी दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 200 किसान एवं प्रतिभागी शामिल हुए। मुख्य अतिथि दाऊ कल्याण सिंह कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के अधिष्ठाता डाॅ. आरबी तिवारी ने मधुमक्खी की उपयोगिता, महत्व के साथ मधुमक्खी पालन से जुड़े व्यवसाय को किसानों को बताया।
उन्होंने बताया कि इजराइल में किसान अपने प्रक्षेत्र में मधु मक्खी पालन के लिए मधु मक्खी बाक्स को रखते हैं, जिससे पर परागित फसलों के साथ-साथ स्वपरागित फसलों में भी परागण की क्रिया अधिक होने के कारण वहां पर फसल का प्रति हेक्टेयर उत्पादकता अत्यधिक प्राप्त होती है। कई बार फसलों की नई किस्में इन्हीं मधुमक्खियों के कारण अचानक इनकी परागण के सहयोग के कारण प्राप्त हो जाती हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. अंगद सिंह राजपूत ने कहा कि मधुमक्खी पालन कृषि आय एवं रोजगार पाने का एक अच्छा माध्यम है। साथ ही हम आय को किस तरह से दुगुनी कर सके, मधुमक्खी एक बहुत अच्छा सामाजिक प्राणी है, जो एक साथ एकजुटता से रहते हैं। आज मधुमक्खी से संयुक्त परिवार को सीखने की आवश्यकता है। सहायक प्राध्यापक डाॅ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि किस तरह से मधु को साफ एवं सुरक्षित रख सकते हैं। डाॅ. प्रवीण वर्मा ने मधुमक्खी पालन के लेखा-जोखा से अवगत कराया। डाॅ. उमेश सिंह ने मधुमक्खी का फसलों के प्राकृतिक संकरण से अवगत कराया।
भाटापारा. कृिष विज्ञान केंद्र में विश्व मध्ुमक्खी दिवस पर उपस्थित विद्यार्थी।
जहां मधुमक्खी का छत्ता, वहां से भाग जाते हैं हाथी
वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. राजपूत ने कहा कि मधुमक्खी की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। प्राकृतिक रूप से डोर सेटा विभिन्न स्थानों में दिखाई देती हैं। इनकी प्रकृति तेज होती हैं तथा इनके आक्रमण से मनुष्य एवं अन्य जीवों को नुकसान पहुंचता है। इसका एक अच्छा उदाहरण यह है कि जिस स्थान पर मधुमक्खी के छत्ते होते हैं, वहां पर हाथी नहीं रहते और भाग जाते हैं। मानव के सबसे अच्छे मित्रों में यदि किसी कीट की गणना होती है तो वह मधुमक्खी है और यह सामाजिक कीट का सर्वोत्तम उदाहरण है। इसके साथ साथ मधुमक्खी का कृषि उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण किसानों का सच्चा मित्र है यही कारण है कि मधु मक्खी पालन धीरे-धीरे ग्रामीण कुटीर उद्योग का रूप धारण कर रहा है।