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सरसों की खरीद में गोलमाल का आरोप लगा किसानों ने तीन बार लगाया जाम

3 वर्ष पहले
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सरसों की सरकारी खरीद में गोलमाल का आरोप लगाते हुए किसानों ने मंगलवार को हर एक घंटे बाद तीन बार खरीद केंद्र के सामने वाली सड़क पर जाम लगा दिया। किसानों का कहना है कि सरसों को सरकारी दामों पर बेचने के लिए सड़कों पर उतरने वाले किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं। प्रशासन के उच्चाधिकारियों ने किसानों की हर समस्या को अनदेखा कर दिया है। उठान ठेकेदार समय पर सरसों का उठान नहींं कर रहे। जिसकी बदौलत खरीद केंद्र सरसों की बोरियों से अट गया है। यहां पर अभी तक करीब 7 हजार बेग व 150 के करीब सरसों की ढेरियां पड़ी है। उठान न होने के कारण सरसों उतारने के लिए जगह नहीं मिल रही। जिसकी बदौलत खरीद केंद्र के बाहर दर्जनों ट्रालियां सरसों से भरी सड़क किनारे खड़ी रही। सड़क पर अधिक ट्रालियां खड़ी होने के कारण दिन भर जाम की स्थिति बनी रही।

किसान मनीराम, विनोद, बलबीर, कृष्ण, रोहतास, अनिल, दलीप, सुरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि सरसों को सरकारी दाम पर बेचने के लिए इस बार सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां पर सरसों तोल में भी गड़बड़ी हो रही है। प्रत्येक बोरी मे 250 से 300 ग्राम सरसों अधिक तोली जा रही है। जिसके बारे में किसानों ने अधिकारियों को भी अवगत करवाया, लेकिन इसका कोई समाधान नही हुआ। आज दोपहर तक केवल मात्र एक ही ट्रक उठान के लिए आया था। सरसों उठाने के लिए लेबर व गाड़ियां दोनों ही कम है। दोनों ठेकेदार ही समस्या का समाधान करने की बजाए एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे है।

भट्टूमंडी में सरसों फसल की सरकारी खरीद दी को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी कर रही है। अनाजमंडी में सोसायटी की दुकान पर किसान का टोकन कटने के बाद सरसों बेचने के लिए कपास मंडी में जाना पड़ता है। कपास मंडी मेें हर तरफ अव्यवस्था का आलम है। यहां जमकर किसानों की लूट हो रही है। किसानों द्वारा बार- बार आवाज उठाने के बावजूद भी प्रशासन के उच्चाधिकारी मौन बने हुए है। सरकारी खरीद करने वाले हैफेड के अधिकारियों ने तो किसानों की चिंता छोड़ अपने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिए। प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद मार्केट कमेटी के सचिव दिलावर बेनीवाल व चेयरमैन अनिल गोरछिया ने कमान संभाली। वे दिन भर किसानों को समझाते रहे तथा घटना के बारे में प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाते रहे। लेकिन दोनों ही बेबस नजर आए।

तय सरकारी दाम पर सरसों की खरीद न होने से गुस्साए किसान रोड जाम करते हुए।

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