2 साल बाद भी नहीं मिल सका 16 हजार किसानों को मुआवजा
किसानों को फसल खराबे पर तत्काल राहत के लिए कहने को मुआवजे (कृषि आदान नुकसान सहायता) की घोषणा तो कर दी जाती है, लेकिन असलियत में उन्हें इसे पाने में महीनों लग जाते है। मामला पचपहाड़ तहसील क्षेत्र में 2016 में खरीफ फसल सोयाबीन में मौसम से हुए नुकसान का है।
किसानों ने इसमें मुआवजे की मांग की। पटवारियों ने सर्वे कर प्रस्ताव भिजवाए। कुछ समय बाद यह मंजूर होकर भी आ गए, लेकिन राशि वितरण में पहले तो एक साल तक बजट नहीं आया। बजट आया तो आधा अधूरा। इससे 8 बीघा से कम भूमि वालों को तो मुआवजा मिल गया, लेकिन इससे ऊपर भूमि वालों का बजट नहीं आने से उन्हें आज तक मुआवजा नहीं मिल सका। फसल खराबे में पचपहाड़ तहसील के सभी मिलाकर 37,088 किसानों का करीब 15 करोड़ रुपए का मुआवजा बना था। बजट आने के बाद इनमें से 21,236 किसानों का मुआवजा उनके सहकारी बैंक स्थित बैंक खातों में भिजवा दिया। बाकी 15,852 किसानों का मुआवजा अभी तक भी नहीं आया। किसान इसे पाने के लिए कभी तहसील कार्यालय तो कभी बैंक के चक्कर लगा रहे हैं।
8 बीघा से ऊपर के किसानों का बजट नहीं आया
तहसीलदार मदनमोहन गुप्ता ने बताया कि 8 बीघा से अधिक जमीन वाले प्रभावित किसानों के मुआवजे का अभी तक बजट नहीं आया है। इससे कम जमीन वाले किसानों से उनके बैंक खाता नंबर और आधार कार्ड काॅपी देने के लिए कहा था। ऐसे दो-पांच प्रतिशत किसान रह गए है, जिनका ये बैंक खाता नंबर आदि गलत होने से उनका मुआवजा नहीं पहुंच सका।