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डायल-112 से लोगों को मिलेगी सहायता, बेहतर हो एक्जीक्यूशन

3 वर्ष पहले
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दुर्ग समेत प्रदेश 11 जिलो में शुरू होने वाली इमरजेंसी सर्विस 112 को लेकर थाना-चौकी प्रभारी समेत सभी राजपत्रित अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान डायल-112 की टीम ने सभी अफसरों को 112 के कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण कराया। इसके अलावा क्राइम मीटिंग में लंबित अपराध के निराकरण, लंबित शिकायते, लंबित चालान, एफएसएल से संबंधित लंबित प्रकरण और थानों में आबकारी एक्ट के तहत जब्त शराब को नष्ट करने के आदेश दिए गए।

एसएसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि, सरकार की इस पहल से सभी को लाभ होगा। लोगों को एक ही नंबर पर डायल करने से काफी मदद मिलेगी। आपातकाल सेवा में काफी सुधार होग। एसएसपी डॉ. शुक्ला ने सभी थाना और चौकी प्रभारियों को इसके बेहतर क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए हैं।

शनिवार को सभी थाना व चौकी प्रभारियों की मीटिंग ली।

क्राइम मीटिंग में सख्ती के बावजूद जिले में बढ़ते अपराध पर नियंत्रण नहीं

थाना और चौकी प्रभारियो ं के लिए क्राइम मीटिंग केवल खानापूर्ती साबित हो रही है। हर दफा पुलिस के आला अधिकारियों द्वारा आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं। बावजूद इसके अगले महीने होने वाली क्राइम मीटिंग से पहले शहर में वारदातों की झड़ी लग जाती है। हद तो तब हो जाती है। जब पुलिस इसके खुलासे के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा देती। फिर भी उसका खुलासा करने में नाकामयाब रहती है। इससे पुलिसिंग पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

हर बार चोरियों पर चर्चा, नतीजा शून्य

पिछली दफा 18 अप्रैल को कंट्रोल रूम में क्राइम मीटिंग हुई। बैठक में चर्चा का प्रमुख विषय लगातार बढ़ती चोरियां रही। उस दौरान एएसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने इस मुद्दे पर सभी थाना प्रभारियों की जमकर खबर ली थी। शनिवार को हुई मीटिंग में भी चोरी की वारदातों पर तमाम थाना और चौकी प्रभारियों से जबाव तलब किया गया। इस बार एसएसपी के आदेश पर बैठक का नेतृत्व करने वाले एएसपी दौलत राम पोर्ते ने भी माना कि क्राइम मीटिंग के बेसिक में लंबित मामले और चोरियां हर दफा चर्चा का विषय रहते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस के अाला अधिकारियों की इतनी समीक्षा के बाद भी न पुलिस बड़ी वारदातों पर लगाम लगा पा रही है और न उनके खुलासे कर पा रही है। वहीं आउटर की कॉलोनी में पेट्रोलिंग नहीं करने की शिकायतें मिलती रहती है।

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